
पार्टी नहीं जनता तय करे प्रत्याशी, नेताओं को ट्रेनिंग देने की जरूरत
शहडोल. पत्रिका के जन एजेण्डा कार्यक्रम के तहत रविवार को पत्रिका कार्यालय शहडोल में जयसिंहनगर विधानसभा क्षेत्र की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक बड़ी संख्या में चेन्जमेकर, वालेन्टियरर्स, एनजीओ मेम्बर्स, प्रबुद्ध नागरिकों एवं युवा मतदाताओं ने भाग लिया। बैठक मेें राष्ट्रीय, प्रादेशिक एवं विधानसभा स्तरीय कई मुद्दों पर विचार मंथन किया गया। जिसमेंं अधिकांश वक्ताओं ने नेताओं की योग्यता व प्रशिक्षण और प्रमुख नदी-नालों का संरक्षण पर जोर दिया, तो कई वक्ताओं ने विकास की स्थाई व्यवस्था पर ध्यान देने की बात कही।
साथ ही एससी-एसटी एक्ट का विरोध कर शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन पर बल दिया। बैठक में विधानसभा स्तरीय कई समस्याएं भी उभर कर सामने आई। जिसमें प्रमुख रूप से इंजीनियरिंग व मेेडिकल कॉलेज और पं. शंभूनाथ यूनिवर्सिटी में स्टाफ व संसाधनों को बढ़ाए जाने, जीवनदायिनी मुडऩा व सरफा नदी के संरक्षण, किसानों को मनरेगा के तहत मजदूर उपलब्ध कराए जाने आकाशवाणी शहडोल से स्थानीय कार्यक्रमों को बंद किए जाने और क्षेत्र में कोयला के स्टॉक कराए जाने के मुद्दे चर्चा में छाए रहे। वक्ताओं ने माना कि जिस प्रकार हर कार्य के लिए लोगों को प्रशिक्षण दिया जाता है, उसी प्रकार नेताओं को भी राजनीति का प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता है।
राजनीति मेें जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए और स्थाई विकास हो। यह सब तभी संभव होगा जब पार्टीगत प्रत्याशी की जगह जनता की ओर से कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में होगा। नेता वही कहलाएगा जो जनता को समझेगा और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने का बीड़ा उठाएगा।
अब जरूरत इस बात की है उम्मीदवार बनाने की प्रक्रिया को कठिन बनाया जाए, क्योंकि सरल व सहज ढ़ंग से बने प्रत्याशियों की वजह से हमारी समस्याएं यथावत बनी हुई है। जनप्रतिनिधियों के कार्यों की हर महीने मॉनीटरिंग होनी चाहिए
जयसिंहनगर क्षेत्र के यह प्रमुख मुद्दे रहे
क्षेत्र में कृषि महाविद्यालय खोला जाए।
नागपुर व मुंबई के लिए सीधी ट्रेन की सुविधा।
किसानों को मनरेगा के मजदूर व प्रति हेक्टे. की दर से राशि मिले।
आकाशवाणी शहडोल से स्थानीय कार्यक्रमों पर लगी रोक हटे।
कोयला की रायल्टी के आधार पर क्षेत्र का विकास।
रिलायंस के सीबीएम प्रोजेक्ट का क्षेत्रीय लोगों को लाभ।
इंजीनीयरिंग, मेडिकल व यूनिवर्सिटी में पूरा स्टाफ व संसाधन हो।
बेरोजगारों को रोजगार की सुविधा मिले।
शुद्ध पेयजल की स्थाई व्यवस्था की जाए।
जब सरकार आर्थिक दृष्टिकोण से कमजोर होती है, तब रोजगार की संभावनाएं बहुत कम होती है।
सुशील सिंघल, पत्रिका चेन्जमेकर।
सरकार यही चाहती है कि लोग शिक्षित न हो, ताकि उनकी वोट की राजनीति चलती रहे और जनता छली जाती रहे।
संदीप तिवारी, अधिवक्ता।
वर्तमान में स्व. दलबीर सिंह व के पी सिंह जैसे क्षमतावान नेतृत्व से ही हमारा संबल बढ़ सकता है।
राजेश सोंधिया, कांग्रेस नेता।
हमें जातिवाद व विकासवाद से हटकर राष्ट्रवाद व समाजवाद की राजनीति करना चाहिए।
अमित मिश्रा, भाजपा नेता।
शहडोल में अमीरों के लिए शॉपिंग काम्पलेक्स बनाए जा रहे हैं, मगर गरीबों के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है।
खिरोधर सोंधिया, कांग्रेस नेता।
निजी व सरकारी स्कूल की शिक्षा के अंतर को खतम कर समान शिक्षा को बढ़ावा देकर बच्चों का भविष्य सवारे।
अमित बजाज, समाजसेवी।
किसानों को अनुदान नहीं प्रोत्साहन राशि दी जाए, क्योंकि जब किसान खुशहाल होगा तभी देश विकसित होगा।
डॉ. भानूप्रताप, कृषि वैज्ञानिक।
योजनाओं के नाम पर मतदाताओं को रिश्वत देने वाली वोट बैंक की राजनीति बंद कर दी जाए।
शुभदीप खरे, अधिवक्ता।
उम्मीदवारों का चयन पार्टीगत नही, बल्कि जनता के बीच से उम्मीदवार सामने आना चाहिए।जो जनका के लिए कार्य करे।
मनीषा माथनकर, समाजसेविका।
हमें राज करने वाला नेता नहीं अपिु जनता का सेवक बनकर कार्य करने वाला जनप्रतिनिधि चाहिए।
अमरीश श्रीवास्तव, अधिवक्ता।
पानी की व्यवस्था पर यदि आज चिंतन नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ी प्यासों मर जाएगी।
राजेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त प्राचार्य।
आश्वासनों पर कार्य करने वाले जनप्रतिनिधियों को बदलने की जरूरत है और पेंशनरों पर ध्यान दिया जाए।
केपी शर्मा, सेवानिवृत्त प्राचार्य।
गरीबों को सस्ता अनाज देने की बजाय, रोजगार की संभावनाएं बढ़ाई जाए और सुविधाओं का विस्तार जरूरी है।
प्रदीप गुप्ता, समाजसेवी।
आदिवासी अंचल में स्वच्छ और साफ छवि वाले नेताओ को मौका मिलना चाहिए, ताकि सुदृढ़ विकास हो सके।
शक्ति सिंह चंदेल, युवा नेता।
Published on:
17 Sept 2018 02:29 pm
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