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जर्जर लाइनें दे रहीं बिजली सप्लाई को झटका, लोग हो रहे परेशान

जरा सी हवा चलने पर ही हो जाते हैं फाल्ट
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electricity problem in village, public problem

जर्जर लाइनें दे रहीं बिजली सप्लाई को झटका, लोग हो रहे परेशान

शहडोल- बिजली की आंख मिचौली से ग्रामीण पिछले 15 दिनों से परेशान हैं। हल्की हवा चलने और बूंदाबांदी होते ही बिजली चली जाती है। जिसके चलते दिन तो लोगों का किसी तरह से कट जाता है, लेकिन रात अंधेरे में काटनी पड़ रही है। जिसकी शिकायत करने पर भी लोगों को समस्या से निजात नहीं मिल पा रही है। जून के महीने में आसमान में बादलों का डेरा बना रहा। बूंदा-बादी के साथ तेज हवाएं भी चलतीं रहीं। जिससे ग्रामीण क्षेत्र की बिजली व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई है।

वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में दो-चार घंटे भी लगातार बिजली नहीं मिल रही है। जिससे गर्मी के मौसम में लोग परेशान हैं। वहीं उनका खेती किसानी का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। सेंदुरी चुनिया निवासी मोहन ने बताया कि सरकार 24 घंटे बिजली देने का वादा करती है, लेकिन दिन में लगातार चार घंटे भी बिजली नहीं मिल रही है। थोड़ी सी हवा चलने पर बिजली गुल हो जाती है। वापस कब आएगी कोई भरोसा ही नहीं है। शिकायत करने के लिए अधिकारियों का फोन भी नहीं रिसीव होता।

ऐसी स्थिति में अघोषित बिजली कटौती ग्रामीण को खूब रुला रही है। पड़मनिया निवासी उदयराज ने बताया कि बरसात के मौसम में बिजली चले जाने से सांप-बिच्छू का डर सताता रहता है। बिजली न रहने से छोटे-छोटे काम के लिए भी लोगों को संभागीय मुख्यालय जाना पड़ रहा है। गांव में जो किसान सब्जी, भाजी लगाए हैं, बिजली न रहने से उसकी भी सिंचाई नहीं हो पा रही है।


लोड अधिक होने से जल रहे ट्रॉसफार्मर

ग्रामीण क्षेत्रों के विद्युतीकरण के लिए कांग्रेस सरकार में राजीव गंाधी और भाजपा शासन काल में अटल ज्योति के नाम से योजना चलाई जा रही है। जिसका सर्वे 15 वर्ष पहले किया गया था। जिसका कार्य 10 वर्ष बाद किया गया। लेकिन लाइन और ट्रॉसफारर्मर पुराने सर्वे के आधार पर ही लगाए गए हैं। जबकि आज आबादी और खपत दो गुनी हो चुकी है।

जिससे लोड अधिक होने से लाइन और ट्रांसफारर्मर सह नहीं पा रहे हैं। नतीजन लाइन और टॉसफारर्मर रोज जल रहे हैं, जिसमें गांव महीनों अंधकार में डूबे रहते हैं। बिजली विभाग के पास सुधार कार्य के लिए पर्याप्त कर्मचारी भी नहीं हैं। जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।