2 मई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भ्रष्टाचार : 3×3 मीटर के पंप हाउस में खप गई 200 बोरी सीमेंट

यहां पानी के नाम पर चली जमकर मनमानी

2 min read
Google source verification
Here's the name of the water, arguably arbitrary

Here's the name of the water, arguably arbitrary

शहडोल. विद्यालय में पेयजल की व्यवस्था के नाम पर लाखों का वारा न्यारा किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। जिसमें पंप हाउस निर्माण के नाम पर शासन से स्वीकृत राशि का विद्यालय प्रबंधन ने जमकर बंदरबाट किया। स्थानीय स्तर पर सामग्री क्रय कर की गई। इस हेर-फेर का काला चिट्ठा कलेक्टर के पास पहुंचा है। पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर से करते हुए मामले की जांच जिला शिक्षा केन्द्र एवं उसके अधीनस्थ अमले को छोड़कर अन्य अधिकारियों से कराए जाने की मांग की गई है।
स्वीकृत हुए 4 लाख 90 हजार
बुढ़ार की चिह्नित माध्यमिक विद्यालयों में पेयजल व्यवस्था के लिए 4 लाख 90 हजार रुपए की दर से राशि स्वीकृति की गई थी। स्वीकृत की गई उक्त राशि में से पहली किश्त २ लाख रुपये जारी किए गए थे। जिसमें से माध्यमकि विद्यालय बालक बुढ़ार, कन्या बुढ़ार, कन्या लखेरन टोला, बकहो एवं जरवाही में निर्माण सामग्री खरीदी की गई है। जिसमें प्रधानाध्यापकों द्वारा फर्जी बिल बनाकर लाखों का वारा न्यारा किये जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
ये लग रहे आरोप
उक्त विद्यालयों में पंप हाउस निर्माण के नाम पर सामग्री खरीदी में अनियमितता की गई है। उक्त विद्यालयों में 3 बाई 3 मीटर के पंप हाउस निर्माण में जो सामग्री व्यय की गई है वह अपने आप में अनियमितता को उजागर करने वाली है। सामग्री खरीदी का जो बिल बनवाया गया है उसमें एक पंप हाउस के निर्माण के लिये 200 बोरी सीमेन्ट, 6 ट्रिप रेत एवं 3 ट्रिप गिट्टी क्रय करना दर्शाया गया है। यह सामग्री खर्च भी हो गई और विद्यालय में एक बोरी सीमेन्ट भी नहीं बची। इतना ही नही पंप हाउस के लिए खिड़की, दरवाजा व रोशन दान क्रय किया जाना दर्शाया गया है जिसमें १० हजार रुपये व्यय किया गया है। जबकि पंप हाउस में रोशन दान हैं ही नहीं।
कराई जाए जांच
पेयजल व्यवस्था के नाम पर की गई अनियमितता की शिकायत बुढ़ार निवासी नारेन्द्र सिंह गहरवार निवासी वार्ड क्रमांक ४ द्वारा कलेक्टर से की गई है। जिसमें शिकायत कर्ता द्वारा मांग की गई है कि कराये गये कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाये। साथ ही व्यय की गई राशि व क्रय की गई सामग्री का मिलान भी कराया जाये। जिससे वस्तु स्थिति स्पष्ट हो जायेगी।