3 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पूर्व मेयर बोलीं, ‘गायों की मौत के ज़िम्मेदार को हो फांसी, मैं दोषी तो मुझे भी ये सज़ा मंज़ूर’

गायों की मौतों के मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की पैरवी करते हुए पूर्व मेयर ने कहा कि जो भो दोषी हो उसे फांसी की सज़ा दी जाए। उन्होंने कहा कि यदि मैं दोषी हूं तो मुझे फांसी दो या अन्य है तो उन्हें फांसी दी जाए।

3 min read
Google source verification

जयपुर की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल ने खुद के कार्यकाल के दौरान नगर निगम की गौशालाओं में हुई गायों की मौतों की सीबीआई से जांच करवाने की मांग की है। यही नहीं उन्होंने पूर्व मेयर अशोक परनामी और मौजूदा मेयर निर्मल नाहटा के कार्यकाल के दौरान हुई गायों की मौतों के मामले में भी सीबीआई जांच करवाने की मांग की है।

खंडेलवाल ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि उनके खुद के मेयर कार्यकाल के दौरान हिंगोनिया गौषाला में गायों की मौत और उनके कारणों की जांच सीबीआई से करवाने के लिए तैयार हैं। लेकिन साथ ही पूर्व मेयर अशोक परनामी और मौजूदा मेयर निर्मल नाहटा के कार्यकाल के दौरान हुई गायों की मौतों की भी देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी से जांच करवाई जानी चाहिए।

पूर्व मेयर और मौजूदा पीसीसी महासचिव ज्योति खंडेलवाल ने राज्य सरकार से केन्द्र सरकार को पत्र लिख कर पिछले 10 वर्षो में 1 लाख से अधिक गायों की मौतों की जाच सीबीआई से करवाये जाने की अनुशंसा भेजने की अपील की। खंडेलवाल ने उच्च न्यायालय द्वारा कोर्ट कमिश्नर को हटाकर न्यायाधिपति या सेवानिवृत्त न्यायाधिपति को हिंगोनिया में प्रशासक नियुक्त करने की भी मांग की।

खंडेलवाल ने कहा, '' आज हिंगोनिया गौशाला में हुई गायों की मौत की पूरे देश में भत्सर्ना हो रही है। लोकसभा और राज्य सभा में भी यह मामला उठ चुका है। आज गौमाता की रक्षा के नाम पर वोट लेकर भाजपा केन्द्र, राज्य व निगमों में काबिज है, लेकिन गौमाता की रक्षा करना तो दूर उनकी हत्यारी बनती नजर आ रही है। भाजपा के नेता अनर्गल बयानबाजी करते हुए दोषियों पर कार्यवाही करने की बजाय कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं। ''

जो दोषी हो उसे फांसी दो

गायों की मौतों के मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की पैरवी करते हुए पूर्व मेयर ने कहा कि जो भो दोषी हो उसे फांसी की सज़ा दी जाए। उन्होंने कहा कि यदि मैं दोषी हूं तो मुझे फांसी दो या अन्य है तो उन्हें फांसी दी जाए।

सामने रखे आंकड़े

खण्डेलवाल ने मीडिया के सामने गायों की मौतों के आंकड़े भी रखे। पूर्व मेयर ने 2004 से 2016 तक के आंकड़े सामने रखे। उनके मुताबिक़:-

2004 से 2016 तक कुल करीब 1 लाख से अधिक गौवंश की मौत

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पूर्व मेयर अशोक परनामी के 5 साल के कार्यकाल में सबसे अधिक 55 हज़ार से 60 हज़ार गायों की हुई मौत

पूर्व मेयर ज्योति खण्डेलवाल (खुद के कार्यकाल) के दौरान 3 साल में 16 हज़ार 975 गौवंश की हुई मौत।

वर्तमान मेयर निर्मल नाहटा के लगभग डेढ साल के कार्यकाल में 21 हज़ार 37 गौवंश की हुई मौत।

इस तरह से रखी खुद के कार्यकाल पर सफाई

ज्योति खंडेलवाल ने खुद के मेयर कार्यकाल के दौरान हुई गायों की मौतों के आंकड़े रखते हुए कहा कि जब मैने 26 नवम्बर 2009 को जयपुर की मेयर का कार्यभार ग्रहण किया तब तक करीब 60 हज़ार गायें 2004 के बाद मौत के मुंह में समा चुकी थी। मैने अपने कार्यकाल की दूसरी ही बोर्ड बैठक में हिंगोनिया गौशाला की स्थिति को नाजुक देखते हुए इसे किसी एनजीओ या गौरक्षक ट्रस्ट या संस्था को देने के लिए चर्चा का एजेण्डा रखा था और लगातार आगे भी बोर्ड मीटिंग में इसे रखा गया। लेकिन गौमाता की रक्षा के नाम पर हल्ला करने वाले भाजपा ने बोर्ड मीटिंग में इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा ही नहीं होने दी।

खंडेलवाल ने कहा कि सरकार अपनी स्थिति साफ करे और 2004 से लेकर 2016 के वर्तमान माह तक प्रत्येक साल की गौवंष की मृत्यु का आंकड़ा जनता के सामने रखे।

आज तक बोर्ड व हिंगोनिया चैयरमेन बीजेपी का

पूर्व मेयर ज्योति खण्डेलवाल ने कहा कि जयपुर नगर निगम का गठन हुए करीब 22 साल हो चुके है और इन 22 सालो में बोर्ड व हिंगोनिया में चैयरमेन भाजपा का ही रहा है। हमेशा से भाजपा के मेयर व चैयरमैन के समय हिंगोनिया गौशाला में गायो की सबसे ज्यादा मौते हुई है। मेरे कार्यकाल में भी बोर्ड व हिंगोनिया का चैयरमैन भाजपा का ही था और उसने कभी हिंगोनिया गौशाला में गायो के लिए चिंता व्यक्त नहीं की ना ही अनियमितताओं या गायों की मौत के मामले में कोई शिकायत की।

यूडीएच मंत्री व मेयर स्तीफा दे

खंडेलवाल ने कहा, ''मैं राज्य सरकार से मांग करती हूं कि या तो स्वायत्त शासन मंत्री व मेयर गायो की मौत की जिम्मेदारी अपने उपर लेते हुए इस्तीफा दें नहीं तो सरकार इन्हे बर्खास्त करें। साथ ही सरकार सीबीआई जांच के लिए केन्द्र सरकार को आग्रह करे। ''