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शादी के 14 मुहुर्त को लील गया लॉकडाउन

ठप रहा शादियों के सीजन पर आधारित व्यापार, हलवाई, बैण्डवाले,घोड़ी बग्घी, व बारात में लाइट उठाने वालें हो रहे रोजी-रोटी को परेशान, 11 जून से फिर शुरू होगें शादी के मुहुर्त पर शादी होने के नहीं दिख रहे कोई आसार

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wedding, marriage

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शहडोल. कोरोना वायरस के चलते चौथे लॉकडाउन के बाद अब अनलॉक-वन की शुरूआत हो चुकी है, मगर शादी ब्याह का कारोबार अभी भी चालू नहीं हो पाया है। पिछले चार लॉकडाउन में शादी के करीब 14 मुहुर्त थे, जिन्हे बिना आयोजन के ही लॉकडाउन लील गया और अब आगामी 11 जून से शुरू होने वाले मुहुर्त में भी कोरोना संक्रमण नजर गड़ाए बैठा हुआ है। जिससे शादी ब्याह के सीजन से अपने घरों का खर्चा चलाने वालों के समक्ष रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। गौरतलब है कि लॉकडाउन की वजह से पिछले माह अप्रैल और मई में करीब 14 शादियों के मुहुर्त थे, जिनमें लॉकडाउन के कारण कई तयशुदा शादियां निरस्त कर दी गई। वहीं कोरोना के भय के बीच अभी भी शादियों की खुशियों पर लॉकडाउन लगा हुआ है।
ऐसे रहे बीते महीनों में शादी के मुहुर्त
माह दिनांक
अप्रैल 16, 17, 25 व 26
मई 1, 2, 4, 5, 6, 15, 17, 18, 19 व 23
जून महीने में शादी के मुहुर्त
जून 11, 15, 17, 27, 29 व 30

नहीं देखी बारात न भव्य खानपान की व्यवस्था
बताया गया है कि कोरोना संक्रमण के दौरान पिछले दो माह में लोगों ने न तो शादी देखी और न ही बाराती। साथ ही भव्य खानपान की व्यवस्था को भी लगभग लोग भूल गए हैं। घर में टीवी और मोबाइल का सहारा है तो बाहर कोरोना का खौफ से लोग अभी भी बेहाल है।
हर व्यापार कोरोना कहर के जद में
शादियों की धूमधाम खत्म हो जाने के कारण शहर के कारोबारियों का धंधा भी मंदा हो गया है। लगभग हर व्यवसायिक सेक्टर कोरोना के कहर की जद में है। कपड़ा, जूता, इलेक्ट्रॉनिक व ऑटोमोबाइल के साथ ही सबसे अधिक वे लोग प्रभावित हो रहे हैं, जो शादियों के सीजन पर ही आश्रित हैं।
दोहरी मुसीबत का कर रहे सामना
बताया गया है कि शादियों की सीजन पर आश्रित मैरिज गार्डन संचालक, हलवाई, बैंड वाले, आतिशबाजी, छतरी, शहनाई, घोड़ी व बग्घी व बारात में लाइट उठाने वाले लोग तो रोजी-रोटी के लिए भी परेशान हो चुके हैं। ऐसे में लोग दोहरी मुसीबत का सामना कर रहे हैं, क्योंकि चारों ओर जहां कोरोना इन लोगों की सेहत का दुश्मन बना हुआ है, वहीं बीते दो महीने में कोरोना ने लोगों को आर्थिक तौर पर पूरी तरह से निचोड़ दिया है।
गृहस्थ सामग्री व गिफ्ट का कारोबार चौपट
बताया गया है शादियां के सीजन में दुकानों से गिफ्ट की जमकर खरीदारी की जाती थी। साथ ही शादी के एक से बढकऱ एक कार्ड छपवाए जाते थे, मगर अब न तो शादी के लिए कार्ड छप रहे हैं न पहले जितना गिफ्ट व दहेज का सामान खरीदा जा रहा है। वहीं गिफ्ट का लेन देन भी सीमित हो गया है। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक्स आयमट, रेडीमेट गार्मेंट, बर्तन व सजावटी सामग्री की बिक्री खासा प्रभावित हो रही है।