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टिप्पणी – हम सबके लिए सामूहिक शर्मिंदगी है कुपोषण

पढि़ए कुपोषण पर विशेष
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शहडोल

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Shiv Mangal Singh

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Updated: 26 Feb 2018, 5:09 PM IST

There is a collective embarrassment for all of us Malnutrition

Shivmangal Singh

शहडोल- कोयलांचल में नौनिहालों की जिंदगी कुपोषण की चपेट में है। इससे पूरी की पूरी पीढ़ी का भविष्य चौपट हो रहा है। कुपोषण के हालात बदतर हैं, इसके बावजूद जिम्मेदार लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें नहीं हैं। न ही इससे लडऩे के ईमानदार प्रयास किए जा रहे हैं। समाज, शासन, प्रशासन सभी इस कुपोषण रूपी कलंक के आगे बौने साबित हैं। यहां के हालात को देखकर इसे सामूहिक शर्मिंदगी का विषय कहें तो अधिक उपयुक्त होगा।

शहडोल जिले में ही 2600 मासूम अति कुपोषित पाए गए हैं। कुपोषण की स्थिति ये है कि गर्भ में पल रहे शिशु का सिर नहीं बन पाता है। यदि उनका गर्भ में विकास हो भी जाए तो वे पंगु पैदा हो रहे हैं। बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे हैं, जिनके जन्म के समय पैर मुड़ गए। इसकी वजह भी कुपोषण ही है। गर्भवती महिलाओं का तो और भी बुरा हाल है। पिछले 10 महीने में इक्कीस हजार माताएं एनीमिक मिलीं हैं। ये स्थिति तब है कि जब कुपोषण के खिलाफ लड़ाई विश्व स्वास्थ्य संगठन, केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

हमें आने वाली पीढिय़ों का भविष्य बचाने के लिए कुपोषण के खिलाफ निर्णायक जंग छेडऩी होगी। इसके लिए समाज की भागीदारी भी जरूरी है। प्रशासनिक अफसरों को इसके लिए और संवेदनशील होना पड़ेगा। मैदानी अमले को चौकन्ना बनाना होगा। सभी योजनाओं के अमल भी कड़ाई से करवाना होगा। कुपोषण की चपेट में वह तबका है जो अपने हक के लिए जागरूक नहीं है। उसे यदि जीने भर के लिए भी रसद मिल जाती है तो वह कृपा मानकर रख लेता है। वह सवाल नहीं करता। इसलिए इस तबके के लोगों के साथ जागरूक लोगों को खड़ा होना पड़ेगा। एनजीओ, सामाजिक संगठन, राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भी अपने हिस्से की जिम्मेदारी पूरी करनी होगी। जब समाज के सभी अंग एक साथ काम करेंगे तभी हम कुपोषण के खिलाफ जंग जीत पाएंगे अन्यथा इन नौनिहालों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद करना भी बेमानी होगा।