
सिकल सेल व थैलेसीमिया से पीडि़त बच्चों में आयरन ओवरलोड को कम करने मिली यह सुविधा
शहडोल. सिकलसेल व थैलेसीमिया से पीडि़त बच्चों को ब्लड चढऩे के बाद उनमें आयरन ओवर लोड की शिकायत होती है। इसे कम करने के लिए अब जिला चिकित्सालय में डिफ्यूजन पंप की सुविधा उपलब्ध हो गई है। इससे बच्चों को समुचित इलाज मिल सकेगा। उल्लेखनीय है कि आदिवासी बाहुल्य संभाग शहडोल में रक्त संबंधित आनुवांशिक बीमारियों सिकलसेल एवं थैलेसीमिया से पीडि़त बच्चों की संख्या अधिक है। इन बीमारियों से पीडि़त बच्चों के शरीर में प्राकृतिक रूप से खून नहीं बनता है, जिससे इनके शरीर का विकास सामान्य गति से नहीं होता है। अनेक प्रकार के अन्य शारीरिक कष्टों से भी इन्हें प्रतिदिन जूझना पड़ता है। इन बच्चों को प्रत्येक 15 से 20 दिनों के अंतराल पर रक्त चढवाने की आवश्यकता पड़ती है। रक्तदान के माध्यम से प्राप्त रक्त का संग्रहण ब्लड बैंक में कर इन बच्चों को ब्लड बैंक से रक्त बिना एक्सचेंज के उपलब्ध कराया जाता है। विभिन्न रक्तदाताओं के द्वारा दिया गया रक्त इन बच्चों को चढाया जाता है, जिसमें आयरन की मात्रा अलग अलग होती है। इससे बच्चों के शरीर में अधिक मात्रा में आयरन संग्रहित हो जाता है। आयरन ओव्हर लोड होने की वजह से बच्चों को अनेक शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनके ह्रदय, किडनी, आंख एवं लीवर पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इसे कम करने के लिए डिफ्युजन पंप नामक उपकरण की आवश्यकता होती है, जिसे थैला पंप भी कहा जाता है। दिशा वेलफेयर की अध्यक्ष रूपाली सिंघई के सुझाव पर डॉ जीएस परिहार सिविल सर्जन जिला चिकित्सालय ने चार पंप मंगवाए गए हैं।
दो रोगी बच्चों में हुआ प्रयोग
शुक्रवार को इन थैला पंप की मदद से दो रोगी बच्चों के शरीर से आयरन ओवर लोड को कम करने के प्रयोग का शुभारंभ किया गया। यह सफल प्रयोग डॉ जी एस परिहार, डॉ गंगेश टांडिया, डॉ सुधा नामदेव, नर्स संध्या सिंह, नर्स प्रीति वर्मा एंव रुपाली सिंघई की उपस्थिति में किया गया। इसके बाद यह सुविधा उपलब्ध कराने वाला प्रदेश का पहला जिला अस्पताल बन गया है। आगे अन्य रोगी बच्चों के शरीर से आयरन ओवर लोड को कम करने का रास्ता खुल गया है।
Published on:
01 Oct 2023 12:19 pm
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