
This lady officer collided with Lee OKee Storm
शुभम बघेल
शहडोल-शहर की एक बेटी ने समुद्र में ओखी तूफान से सात घंटे तक टक्कर ली और आखिर में वह विजेता रही। उसकी नाव ने समुद्र की ऊंची-ऊंची लहरों में हिचकोले खाए लेकिन वे लहरें उसे नहीं डरा सकीं। चट्टानी इरादों वाली इस साहसी लड़की ने तेज हवाओं को अपना हमसफर बनाया और मुंबई से लेकर गोवा तक का सफर समुद्र के रास्ते तय किया। हम बात कर रहे हैं कैप्टन अर्पिता द्विवेदी की। वह थलसेना में अधिकारी है और फिलहाल मेरठ में पोस्टिंग है। अर्पिता सेना के एक विशेष अभियान का हिस्सा बनकर वहां पहुंची है और अभी वह चुनौतियों से जूझने का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है।
भारतीय सेना का 20 अधिकारियों का एक दल 1 दिसंबर को मुंबई से रवाना हुआ था। इस दल में चार नौकाएं हैं और पांच क्रू मेंबर भी हैं। इस पूरे दल में अर्पिता के अलावा एक और महिला अधिकारी है। वह सेना के विशेष नौकायन अभियान का हिस्सा है। इस दल को मुंबई से गोवा पहुंचना था। लेकिन अरब सागर में अचानक ओखी तूफान ने दस्तक दे दी। अचानक आए तूफान में सेना का पूरा दल फंस गया। समुद्र में उठ रहीं ऊंची-ऊंची लहरों और तेज हवाओं के बीच ये दल सात घंटे तक जूझता रहा।
इस बीच इस दल के सभी सदस्यों ने हौसला बनाए रखा और आखिरकार तूफान पर भी विजय हासिल की। कैप्टन अर्पिता ने पत्रिका को फोन पर बताया कि 3 दिसंबर को तड़के सुबह लगभग चार बजे टीम के सदस्यों ने नोटिस किया कि कुछ गड़बड़ है। मुंबई और रत्नागिरि के बीच समुद्र में अचानक ऊंची-ऊंची लहरें उठने लगीं और तेज हवाएं चलने लगीं। अर्पिता ने बताया कि बहुत ही भयानक स्थिति थी लेकिन किसी ने भी हिम्मत नहीं हारी और किसी तरह सात घंटे की चुनौती को पार करते हुए रत्नागिरि पहुंच गए। अर्पिता ने बताया कि तेज तूफान की वजह से नाव भी हिलने लगी थी, तभी ट्रेनिंग के अनुसार हवाओं से बचते हुए जिगजैग पैटर्न में आगे बढ़ते हुए सुरक्षित स्थान तक पहुंचे। अर्पिता के अनुसार इस बीच रत्नागिरी में दो दिन का हाल्ट भी करना पड़ा था।
2013 में चयन और 2015 में कारगिल में पोस्टिंग
अर्पिता शहडोल के गुड शेफर्ड कान्वेंट स्कूल की छात्रा रही हैं। यहां से 12वीं की पढ़ाई के बाद जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से बीई की पढ़ाई की। वर्ष 2013 में एसएसबी के माध्यम से अर्पिता का आर्मी में सिलेक्शन हो गया। अर्पिता ने चेन्नई स्थिति ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी में दो साल का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण पूरा होते ही पहली पोस्टिंग कारगिल में मिली। उसी दौरान उसको प्रमोशन भी मिला। वह लेफ्टिनेंट से कैप्टन बनी। फिलहाल अर्पिता मेरठ में पदस्थ है।
संपर्क कटने से मां को सताती रही चिंता
समुद्री अभियान में ओखी चक्रवात से घिरने के दौरान संपर्क कटने से पूरा घर परेशान हो गया था। अर्पिता के पिता सुनील द्विवेदी के अनुसार न्यूज पर सुनने के बाद हर वक्त मां ऊषा द्विवेदी के कान फोन की घंटी पर ही लगे रहे। इस बीच तूफान के चलते फोन से भी संपर्क कट गया, जिससे और चिंता बढ़ गई। हालांकि पिता को भरोसा था कि उनकी बेटी दिलेर है और वह चुनौतियों का सामना अच्छे से करना जानती है।
Published on:
11 Dec 2017 12:44 pm
बड़ी खबरें
View Allशहडोल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
