
देश के चार राज्यों की लाइफ लाइन है यह नदी, अतिक्रमण और प्रदूषण की वजह से उद्गम में ही तोड़ रही दम
शहडोल. संभाग की लाइफ लाइन सोन का अपने उद्गम स्थल से ही दम घुटने लगा है। औद्योगिक क्षेत्र, थर्मल पॉवर प्लांट से निकलने वाले रसायन युक्त जल के साथ ही नालों के गंदे पानी की वजह से सोन के जल के स्तर में काफी अंतर देखने मिला था। इसका खुलासा लगभग दस वर्ष पहले पं. एसएन शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रो. एमके भटनागर के मार्गदर्शन में तीन छात्रों द्वारा वर्ष 2012-13 में किए गए शोध के साथ ही अन्य शोध में हुआ था। इस दौरान भयावह स्थिति मिली थी। इसके बावजूद अभी तक सोन को बचाने कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई गई और न ही किसी ने कोई पहल ही की गई है। रिसर्च के अनुसार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की अनिवार्यता पर जोर दिया था लेकिन वह भी महज औपचारिकता ही साबित हुआ था। वर्ष 2012-13 में तीन शोधार्थी छात्रों द्वारा पेपर मिल, चचाई थर्मल पॉवर प्लांट और बाणसागर के जल के भौतिक और रासायनिक गुणों के साथ भारी धातुओं की मात्रा का परीक्षण किया था। जिसमें औद्योगिक क्षेत्रों और थर्मल पॉवर प्लांट से निकलने वाले रसायन युक्त जल के साथ ही कृषि भूमि का अपशिष्ट पानी व कॉलोनियों के गंदे पानी के सोन में मिलने की वजह सोन के जल में कठोरता के साथ ही टीडीएस, टर्बिडिटी और पीएच के पैरामीटर में भी अंतर पाया गया था। हालांकि इसमें धातुओं के परीक्षण में इनकी मात्रा बहुत कम पाई गई थी। अमरकंटक के पहाड़ों से निकलकर चार राज्यों की प्यास बुझाने वाले सोन नदी की धार इन दिनों अतिक्रमण और जगह-जगह बांध की वजह से पतली हो रही है। अमरकंटक से निकली सोन नदी उत्तरप्रदेश, झारखंड से होते हुए बिहार पहुंचती है। उद्गम से निकलते ही कुछ दूरी पर ही अलग-अलग स्थानों पर बांध बना दिए गए हैं। जिसकी वजह से कुछ दूर पर ही सोन गर्मी के दिनों में सूखने लगती है।
Published on:
24 May 2022 12:17 pm
बड़ी खबरें
View Allशहडोल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
