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जब इन बच्चों के मजबूत दांत देख चौक गए अमेरिकी डॉक्टर

देसी खाने का कमाल, दांतों से कैविटी कोसों दूर...

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When the American doctor went to see the strong teeth of children here

When the American doctor went to see the strong teeth of children here

शुभम बघेल
शहडोल- आदिवासी बच्चों के मजबूत दांत देख अमेरिकन डॉक्टर भी चौंक गए। उन्होंने बताया कि बच्चों के इतने मजबूत दांत तो कई अन्य देशों में भी नहीं देखे हैं। भारत के दूसरे राज्यों में ही छोटे-छोटे बच्चों के दांत भी कैविटी की वजह से कमजोर हो रहे हैं, लेकिन यहां के बच्चों के दांतों से कैविटी कोसों दूर है।

डॉक्टर्स के अनुसार आदिवासियों ने खानपान की वजह से खुद को दांतों की बीमारियों से दूर रखा है। दरअसल अमेरिका के डॉक्टर और प्रोफेसर की टीम दांतों के इलाज के लिए शहडोल पहुंची थी। डॉक्टर्स की टीम आदिवासी अंचलों में पहुंचकर इलाज करने के साथ रिसर्च भी किया। अमेरिका यूनिवर्सिटी के डॉक्टर्स और प्रोफेसर्स की टीम ने माना है कि आदिवासी समाज के बच्चों में कैविटी (दांतों में कीड़े लगना) की बीमारी नहीं है, लेकिन इनको ब्रशिंग सिखाना जरूरी है। ९० फीसदी से ज्यादा ग्रामीण और बच्चे दांतों की सफाई के तौर-तरीके नहीं जानते। डॉक्टरों की मानें तो आदिवासी बच्चों में कैविटी न होने के पीछे नेचुरल फूड एक मुख्य वजह है। यहां सिर्फ 15 फीसदी आदिवासी बच्चों को कैविटी मिली है।

कई देश और राज्यों में शहडोल बेहतर
न्यू मैक्सिको स्टेट यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों के अनुसार दूसरे देश और राज्यों की तुलना में शहडोल में बच्चों में कम कैविटी मिली है। अमेरिका के प्रोफेसरों ने तर्क दिया है कि आदिवासी बच्चे प्रोसेस्ड फूड नहीं खाते हैं। इनके खान-पान में ऐसी देसी चीजें शामिल हैं जो इनके दांतों को बीमारियों से बचातीं हैं।

नेचुरल डाइट सुरक्षा कवच
न्यू मैक्सिको स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रेबिका सेनजेड के मुताबिक आदिवासी गांवों में बच्चों के दांतों का इलाज किया। यहां पर आदिवासी बच्चों में बेहद कम कैविटी देखने को मिली, जबकि अन्य देशों में काफी ज्यादा है। आदिवासियों का देसी और नेचुरल डाइट उनके दांतों के लिए सुरक्षा कवच का काम कर रहा है। इसकी वजह से बच्चों को कैविटी और कई गंभीर बीमारियां दूर हैं। आदिवासी क्षेत्रों में पहुंचकर हमारी टीम को यह नई जानकारी मिली है।

नीम बबूल व देशी डाइट है वजह
शहडोल के वरिष्ठ दंतरोग विशेषज्ञ डॉक्टर जीएस परिहार ने बताया ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी ब्रशिंग के तौर पर महिलाएं, पुरुष और बच्चे नीम और बबूल की दातून करते हैं। देशी डाइट की वजह से दांतों में कीड़े नहीं लग पा रहे हैं। प्रोसेस्ड फूड आदिवासी बच्चे गांवों में खाते नहीं हैं, जिसकी वजह से बच्चों के दांत आज भी कैविटी से सुरक्षित हैं। संभाग के आदिवासी क्षेत्रों में यह बेहतर है कि देसी खाने से और प्रोसेस्ड फूड न खाने की वजह से बच्चों के दांत मजबूत हैं।

गाजर, अमरूद की वजह से मजबूती
न्यू मैक्सिको स्टेट यूनिवर्सिटी की दंत चिकित्सक डॉक्टर नीता शुक्ला के मुताबिक आदिवासी अंचलों में कैविटी की समस्या बहुत कम मिली है। डॉक्टरों की टीम ने इस पर मंथन किया तो यह सामने आया कि ग्रामीण परिवार और बच्चे अक्सर हर फलों को खाने के साथ चबाने वाले फल ज्यादा उपयोग करते हैं। कोक सोड़ा न मिलकर सादा पानी उपयोग कर रहे हंै। दांतों के इनेमल में अम्ल नहीं जम पाते हैं, जिससे कैविटी इन बच्चों को नहीं घेर पाती है।