
शहडोल- जिला उपभोक्ता फोरम में अध्यक्ष की नियुक्ति न होने की वजह से उपभोक्ताओं को न्याय नहीं मिल रहा था। इस संबंध में सरकार ने फैसला लिया है कि अब उपभोक्ता फोरम के सदस्य भी अंतिम फैसला सुना सकते हैं। सरकार के इस निर्णय से उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और पेंडिंग मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। शहडोल उपभोक्ता फोरम की सदस्य शालिनी कटारे, संजय पांडे के मुताबिक मध्यप्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतिरोपण आयोग भोपाल द्वारा आदेशित किया गया है कि अब उपभोक्ता फोरम के सदस्य ही अंतिम फैसला सुनाने के लिए सक्षम हैं। उन्होंने ने बताया कि उनके पास अभी लिखित आदेश तो नहीं आया है लेकिन फोन पर मैसेज आ चुका है। जैसेे ही उनके पास लिखित आदेश आ जाएंगे, वो हर केस में अंतिम फैसला लेना शुरू कर देंगे।
फोरम में शिकायत करते समय ये रखें ध्यान
अगर आप कंज्यूमर फोरम में शिकायत करने जा रहे हैं, तो शिकायत के साथ आपको ऐसे डॉक्यूमेंटस की कॉपी देनी होगी, जो आपकी शिकायत का समर्थन करें, इनमें कैश मेमो, पक्की रसीद, एग्रीमेंट्स आदि हो सकते हैं। कंज्यूमर फोरम में शिकायत की 3 कॉपी जमा करानी होती हैं। इनमें एक कॉपी ऑफिस के लिए और एक विरोधी पार्टी के लिए होती है।शिकायत आप खुद भी कर सकते हैं, या फिर वकील के जरिए करवा सकते हैं। शिकायत के लिए पोस्टल ऑर्डर के जरिए फीस जमा करानी होगी। पोस्टल ऑर्डर प्रेसिडेंट, डिस्ट्रिक्ट फोरम, या स्टेट फोरम के पक्ष में बनेगा।
कंज्यूमर फोरम में कैसे करें शिकायत
कंज्यूमर फोरम में अगर आप शिकायत करना चाहते हैं तो आप ऑनलाइन, ऑफलाइन दोनों तरह से कंप्लेन कर सकते हैं, हलांकि शहडोल संभाग में अभी ऑनलाइन शिकायत की व्यवस्था नहीं है। इसके लिए आपको कंज्यूमर फोरम जाना होगा। उपभोक्ता को सबसे पहले लिखी हुई शिकायत की नोटिस विक्रेता को देनी होती है। उसके बाद ही विक्रेता के खिलाफ उपभोक्ता कोर्ट या फोरम में कंप्लेन कर सकते हैं। जहां शिकायत को सही तरीके से लिखकर सबूत के साथ पेश करनी पड़ेगी। जिससे सच्चाई साबित हो सके ।
कहां कब कर सकते हैं शिकायत
- 20 लाख रुपए तक के मामलों की शिकायत डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम में।
- 20 लाख से 1 करोड़ तक के मामलों की शिकायत स्टेट कंज्यूमर फोरम में।
- 1 करोड़ से ऊपर तक के मामलों की शिकायत नेशनल कंज्यूमर फोरम में कर सकते हैं।
शिकायत के लिए फीस
- 1 लाख रुपए तक के मामले के लिए १०० रुपए फीस।
- 1 से 5 लाख रुपए तक के मामले के लिए 200 रुपए फीस।
- 10 लाख रुपये तक के मामले के लिए 400 रुपए फीस।
- 20 लाख रुपये तक के मामले के लिए 500 रुपए फीस।
- 50 लाख रुपये तक के मामले के लिए 2000 रुपए फीस।
- एक करोड़ रुपये तक के मामले के लिए 4000 रुपए फीस।
परेशानी के लिए मांग सकते हैं मुआवजा दावा
उपभोक्ता अपने साथ हुई परेशानी के लिए विक्रेता पर मुआवजे का दावा भी कर सकता है और साबित हो जाने पर विक्रेता को फोरम या कोर्ट के द्वारा लगाए जाने वाले जुर्माने का भुगतान करना पड़ता है और अगर मामला गंभीर हो तो विक्रेता को जुर्माना और जेल तक हो सकती है।
ये भी जान लीजिए
24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है साल १९६८ में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम विधेयक लाया गया था। इसलिए भारत सरकार ने 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस घोषित किया,
राष्ट्रपति ने इसी दिन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 को स्वीकार किया था।
15 मार्च को वर्ल्ड कंज्यूमर राइट्स डे
15 मार्च को रल्प नाडेर द्वारा उपभोक्ता आंदोलन का प्रारंभ अमेरिका में किया गया, नाडेर के आंदोलन द्वारा 15 मार्च 1962 को अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने उपभोक्ता संरक्षण विधेयक अनुमोदित किया था। इसी कारण से 15 मार्च को इंटरनेशनल उपभोक्ता दिवस के तौर पर मनाया जाता है।
भारत में वर्ल्ड उपभोक्ता दिवस
भारत में वल्र्ड उपभोक्ता दिवस साल 2000 से हर साल मनाया जाने लगा। उपभोक्ता आंदोलन साल 1966 में जेआरडी टाटा ने कुछ व्यापारियों के सहयोग से उपभोक्ता संरक्षण के तहत फेयर प्रैक्टिस एसोसिएशन की स्थापना मुंबई के साथ ही भारत के कुछ और प्रमुख शहरों में की गई । उपभोक्ता आंदोलन बढ़ता रहा, 9 दिसंबर 1986 प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा उपभोक्ता संरक्षण विधेयक संसद में पारित किया गया। और इसमें साल 1993 और 2002 संशोधनों के बाद ये एक सरल अधिनियम हो गया है। इसके अधीन आदेशों का पालन ना करने पर धारा 27 के तहत कारावास और दंड तथा धारा 25 के तहत कुर्की किए जाने का प्रावधान है।
Published on:
15 Mar 2018 12:26 pm
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