
गणेश चतुर्थी पर ऐसे करें पूजन, खुशियों से झोली भर देंगे गजानन
शहडोल. प्रत्येक हिन्दू माह में दो चतुर्थी तिथि आती हैं। यह तिथि भगवान गणेश को समर्पित है। इन दो चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं। यह चतुर्थी प्रथम पूज्य गणेश को समर्पित है। पंडित लक्ष्मीकांत द्विवेदी के अनुसार सनातन धर्म में 24 दिन ऐसे होते हैं, जो पूर्णत: भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित है। भगवान गणेश को वैसे भी प्रथम देव माना गया है। सबसे किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश का ही आह्वान किया जाता है, उनको आसन दिया जाता है, उसके बाद पूजा की जाती है, जिससे सभी काम सफल हों। भगवान गणेश के पूजन के बाद ही सभी देवों-आराध्यों की पूजा की जाती है। इस हिसाब से भगवान गणेश की आराधना बहुत ही महत्वपूर्ण है।
प्रसिद्ध है मंडला का गणपति मंदिर
गणेशजी के पूजन के लिए मंडला स्थित सिंहवाहनी वार्ड स्थित के नाना घाट के पास गणपति मंदिर भी प्रसिद्ध है। यहां हर बुधवार के साथ विनायक चतुर्थी के दिन भी भक्तों की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ती है। गणपति मंदिर के लिए यह ख्याति है कि यहां भक्तों की मनोकामनाएं बहुत जल्दी पूरी होती है।
ये है पूजन की विधि
विनायक चतुर्थी के दिन दोपहर को मध्यान्ह काल में पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद गणेशजी के सामने हाथ जोड़कर विनायक चतुर्थी का व्रत करने का संकल्प लें। इसके बाद मध्याह्न काल में एक पाटे पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेशजी की छोटी प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद कलश स्थापित कर विधि-विधान से उनकी पूजा करें व कथा पढ़ें। गणेशजी को मोदक का भोग लगाकर आरती आदि करें।
संध्याकाल में स्नान आदि से निवृत्त होकर गणेशजी की पुष्प, अक्षत, शुद्ध जल, पंचामृत और दुर्वा से पूजा करें। आरती व पुष्पांजलि अर्पित कर प्रदक्षिणा करना चाहिए। पूजा समाप्ति के समय भगवान विघ्नहर्ता से सुख और मंगल की कामना करें। पूजा करते समय गणेशजी के नीचे दिए गए 10 नामों को पढ़ते हुए 21 दुर्वा उन पर चढ़ाएं।
Published on:
17 Jul 2018 06:48 pm
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