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22 वर्षों से थाने में ‘कैद’ डॉ भीम राव अंबेडकर की प्रतिमा

शाहजहांपुर जिले के एक थाने में डॉ. भीम राव अंबेडकर की प्रतिमा पिछले दो दशक से रखी हुई है।

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भीम राव अंबेडकर प्रतिमा

शाहजहांपुर। संविधान निर्माता डॉक्टर भीम राव अंबेडकर के नाम में 'राम जी' जोड़ने जाने पर सियासी बहस छिड़ी हुई है। नेता एक-दूसरे पर अंबेडकर के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं। बड़ी बड़ी बातें भी कर रहे हैं, लेकिन उनका अंबेडकर से वास्ता कितना है, यह उनके सम्मान में बनवाई गई प्रतिमाएं बयां कर रही हैं। शाहजहांपुर जिले के एक थाने में डॉ. भीम राव अंबेडकर की प्रतिमा पिछले दो दशक से रखी हुई है। पुलिस की माने तो बदहाल हो चुकी इस प्रतिमा की आज तक किसी भी राजनैतिक पार्टी या नेता ने सुध नहीं ली।


विवाद के बाद थाने में रखी गई प्रतिमा
मीरानपुर कटरा थाने के मालखाने में 22 वर्षों से डॉ. भीम राव अंबेडकर की 10 फीट ऊंची प्रतिमा रखी हुई है। दरअसल 29 जुलाई 1995 जब उत्तर प्रदेश में पहली बार बसपा की सरकार बनी तो बाबा साहब भीम राव अंबेडकर के अनुयाइयों ने उनकी प्रतिमा को कटरा कस्बे में चौराहे पर स्थापित किया था। लेकिन कुछ लोगों के विरोध करने पर तत्कालीन तहसीलदार और सीओ ने प्रतिमा को चौराहे से उठवाकर थाने के मालखाने में रखवा दिया। उसके बाद से यह प्रतिमा थाने के मालखाने में कैद है।


बदहाल है अंबेडकर की प्रतिमा
मालखाने में गंदगी और कचरे के बीच रखी यह प्रतिमा अब बदहाल हो चुकी है। बाबा साहब भीम राव अंबेडकर के सम्मान में बड़ी बड़ी बातें करने वालों का इस ओर ध्यान नहीं है। पुलिस के कपड़े भी इसी प्रतिमा के पास सुखाए जाते हैं। चूंकि इस प्रतिमा से संबंधित थाने में न ही कोई मुकदमा दर्ज है और न ही कोई विवाद बचा है। फिर भी लावारिस दिखाकर पुलिस और प्रशासन इसे अपनी हिरासत में लिए हुए है। हैरत की बात है कि आज तक किसी भी नेता ने यह जानने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर संविधान निर्माता और दलितों के मसीहा की प्रतिमा को यहां क्यों रखा गया है।


अब तक किसी ने नहीं किया दावा
थाना कटरा के थानाध्यक्ष धनंजय सिंह ने बताया कि थाने के रिकॉर्ड के मुताबिक डॉक्टर अंबेडकर साहब की एक प्रतिमा के मालखाने में है। पिछले 22 साल से अब तक किसी ने प्रतिमा को लेने का दावा नहीं किया है। उच्च अधिकारियों को भी कई बार लिखा गया, लेकिन उनसे भी कोई दिशा-निर्देश नहीं मिला है।

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