
शाहजहांपुर। प्रसाद भवन की बड़ी बहू और जितिन प्रसाद की भाभी नीलिमा प्रसाद भी प्रसाद भवन की गिरती हुई साख को बचाने में नाकामयाब हो गयीं। एक बार फिर कांग्रेस नेता कुंवर जितिन प्रसाद के बाद अब नीलिमा प्रसाद को भी सपा प्रत्याशी जहांआरा बेगम से 5368 वोट से करारी हार का सामना करना पड़ा है। आपको बता दें कि इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता कुंवर जितिन प्रसाद ने भी प्रसाद भवन के साथ-साथ कांग्रेस की भी लुटिया डुबोई थी। वर्तमान समय में प्रसाद भवन से नीलिमा प्रसाद के देवर कुंवर जीवेश प्रसाद ही सिर्फ जिला पंचायत सदस्य हैं।
नीलिमा प्रसाद खुद सड़कों पर उतरीं और अपने चुनाव में गली कूंचो की खाक छानी लेकिन इसके बावजूद नीलिमा प्रसाद मतदाताओं के बीच बनी प्रसाद भवन की दूरी को नहीं बदल पायीं। हालांकि नीलिमा प्रसाद शाहजहांपुर की जिस गली से निकलतीं उन पर फूलों की वर्षा होती थी लेकिन नीलिमा प्रसाद इस फूलों की वर्षा से भी मतदाताओं में भरोसा कायम नहीं कर सकीं। शाहजहांपुर के प्रसाद भवन का लखनऊ से दिल्ली तक राजनीति में बड़ा बोलबाला था लेकिन प्रसाद भवन की लगातार जनता से बढ़ती दूरी के चलते आज प्रसाद भवन से राजनीति लगातार खिसकती जा रही है।
अब से करीब 16 साल पहले साल 2001 में जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुंवर जितेंद्र प्रसाद की मृत्यु के बाद जब प्रसाद भवन पर संकट गहराया तो कान्ता प्रसाद ने पति की मृत्यु के बाद बेटे कुंवर जितिन प्रसाद को राजनीति का ककहरा सिखाया और घर की देहरी लांघी थी। पति की मौत के बाद 2002 में शाहजहांपुर लोकसभा से हुए उपचुनाव में कान्ता प्रसाद को भी करारी हार का सामना करना पड़ा था। अब एक बार फिर प्रसाद भवन से राजनीति धीरे-धीरे खिसक रही है। जिसमें पहले नीलिमा प्रसाद के पति कुंवर जयेश प्रसाद शाहजहांपुर-पीलीभीत से एमएलसी थे लेकिन पिछली साल एमएलसी का चुनाव हार गए। वहीं 2014 में कुंवर जितिन प्रसाद लखीमपुर जिले की धौरहरा से लोकसभा का चुनाव हारे। हाल ही में हुए यूपी विधानसभा में जितिन प्रसाद शाहजहांपुर की तिलहर विधानसभा से भी नहीं जीत सके।
Published on:
02 Dec 2017 12:44 pm
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