
शाहजहांपुर में हादसे में 5 लोंगों की मौत के बाद रोते-बिलखते परिजन।
खीरी के उचौलिया थाना क्षेत्र के बनका गांव का 26 वर्षीय हरिओम सैनी अपने साढ़ू सेठपाल, साली पूजा, चार वर्षीय भांजी निधि व डेढ़ वर्षीय भांजे आर्यांश के साथ एक ही बाइक से निगोही क्षेत्र के बिक्रमपुर चकौरा से अपने पैतृक गांव बनका जा रहा था। रोजा यार्ड क्षेत्र में शाम साढ़े छह बजे एक अनाधिकृत रास्ते से वह रेल लाइन पार कर रहा था। तभी गरीब रथ ट्रेन की चपेट में आने से सभी की मौत हो गई। हादसे के बाद बाइक ट्रेन के इंजन में फंसकर करीब 200 मीटर तक घिसटती चली गई।
हादसे से कुछ देर पहले तक घर में शोर था, खुशियां थीं। निधि और आर्यांश अपनी मौसी के घर जाने के लिए उत्साहित थे। परी भी उनके साथ जाना चाहती थी। वह रोई, उसने जिद की, वह अपनी मां का पल्ला पकड़कर बिलखती रही कि मुझे भी साथ ले चलो। लेकिन मां-बाप ने उसे घर पर ही रोक लिया। उसे बहलाने के लिए एक छोटा सा वादा किया- "तुम घर पर रुको, आएंगे तो तुम्हारे लिए 'चीज' (मिठाई/खिलौना) लाएंगे।" वह 'चीज' लाने का वादा ही था जिसने परी के आंसू पोंछे थे। वह घर की चौखट पर इसी उम्मीद में बैठी थी कि शाम को जब पापा लौटेंगे, तो उनके हाथ में उसके लिए उसकी पसंद का सामान होगा।
कुदरत का क्रूर खेल देखिए, जिस जिद को पिता ने ठुकराया, उसी ने परी की जान बचा ली। लेकिन अब इस 8 साल की बच्ची के सामने वह पहाड़ जैसा दुख है जिसे वह ठीक से समझ भी नहीं पा रही। वह सिसकते हुए बस इतना कह पा रही है कि मैंने कहा था मुझे ले चलो, पर पापा ने मना कर दिया… बोले थे चीज लाएंगे।
घर में लोगों की भीड़ है, चीख-पुकार है, लेकिन परी की नजरें रह-रहकर दरवाजे की ओर उठ जाती हैं। उसे इतना तो समझ आ रहा है कि कुछ बहुत बुरा हुआ है, पर वह यह नहीं समझ पा रही थी कि वे अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। पड़ोसियों और रिश्तेदारों की आंखें तब भर आती हैं जब परी अपनी मासूमियत में पूछती है कि सब रो क्यों रहे हैं? भाई ब्रह्मपाल ने बताया कि बुधवार को सेठपाल, पत्नी व दो बच्चों के साथ खरीदारी करने के लिए आए थे। साढू के घर जाते समय उनकी मौत हो गई। अब उनके परिवार में एक मात्र बेटी परी बची है।
Updated on:
25 Dec 2025 10:58 am
Published on:
25 Dec 2025 10:58 am
