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जूतों की माला और झाड़ू की मार! जानिए शाहजहांपुर की ‘जूतेमार’ होली का 300 साल पुराना इतिहास

Holi 2026: इस शहर में होली पर अंग्रेज अफसर को लॉट साहब बनाकर जुलूस निकाला जाता है और उनपर जूते-चप्पल बरसाए जाते हैं। सुरक्षा के लिए पुलिस को मस्जिदें ढंकनी पड़ती हैं । आखिर क्यों दी जाती है यहां जूतों की सलामी? यहां पढ़ें पूरी कहानी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - एआइ

Holi 2026 : होली के हजार रंगों के बीच एक रंगीला ढंग यूपी के शाहजहांपुर की 300 साल पुरानी परंपरा का भी है। होली के रंग कहीं फूलों से खिलते हैं तो कहीं लट्ठमार होली की धूम होती है, लेकिन यहां के लोगों की होली और मस्ती का अंदाज सबसे जुदा है। यहां होली के दिन 'जूतेमार होली' खेली जाती है। इसमें एक शख्स को लॉट साहब बनाकर भैंसा गाड़ी पर घुमाया जाता है और पूरे रास्ते उन पर जूतों और झाड़ुओं की बौछार की जाती है। इस बार यह ऐतिहासिक जुलूस 4 मार्च को निकाला जाएगा।

क्या है लॉट साहब का जुलूस?

शाहजहांपुर की यह परंपरा करीब 300 साल पुरानी बताई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंग्रेजी शासन के दौरान गवर्नर जनरल को लॉट साहब कहा जाता था। उस समय अंग्रेजों द्वारा किए गए अत्याचारों के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए शहर के लोगों ने यह तरीका निकाला था। आज भी लोग सांकेतिक रूप से एक व्यक्ति को अंग्रेज अफसर (लॉट साहब) का रूप देते हैं, उसे जूतों की माला पहनाते हैं और भैंसा गाड़ी पर बैठाकर पूरे शहर में घुमाते हैं। रास्ते भर लोग उन पर जूते-चप्पल बरसाकर अपना आक्रोश व्यक्त करते हैं।

सुरक्षा के लिए पहनाया जाता है हेलमेट

जुलूस के दौरान 'लॉट साहब' को चोट न लगे इसके लिए खास इंतजाम किए जाते हैं। उन्हें भैंसा गाड़ी पर एक तख्त पर बैठाया जाता है और सिर पर मजबूत हेलमेट पहनाया जाता है। उनके साथ गाड़ी पर मौजूद लोग उन पर झाड़ू से प्रहार करते हैं और 'होरियारे' लाट साहब की जय बोलते हुए चप्पलों की बौछार करते हैं। यह जुलूस सुबह 9 बजे फूलमती मंदिर से शुरू होता है और दोपहर 12 बजे संपन्न होता है। परंपरा के मुताबिक, रास्ते में पड़ने वाली कोतवाली में कोतवाल साहब खुद लॉट साहब को सलामी देते हैं और इनाम भी देते हैं।

छावनी में तब्दील होगा शहर

इस अनोखी होली में हुड़दंग और विवाद की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। इस बार पिछले साल के मुकाबले भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। सुरक्षा के लिए 30 इंस्पेक्टर, 150 सब-इंस्पेक्टर, 600 कांस्टेबल और 300 होमगार्ड्स की ड्यूटी लगाई गई है। इसके साथ ही पीएसी पैरामिलिट्री फोर्स भी मोर्चा संभालेगी। अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और ड्रोन कैमरों से पूरे मार्ग की निगरानी की जा रही है।

धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए अनूठी पहल

सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रशासन ने एक अनोखा कदम उठाया है। जुलूस के रास्ते में पड़ने वाली करीब 92 मस्जिदों को तिरपाल और पॉलिपैक से पूरी तरह ढंक दिया गया है ताकि उन पर कोई रंग या गंदगी न पड़े। शहर की गलियों को बैरिकेडिंग से बंद कर दिया गया है। हालांकि मस्जिदों को ढंकने को लेकर कुछ लोगों में नाराजगी भी है लेकिन प्रशासन का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने और धार्मिक स्थलों को सुरक्षित रखने के लिए यह जरूरी है। मुस्लिम धर्म गुरुओं के साथ भी शांति समिति की बैठकें की गई हैं।