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तिहाड़ जेल से गांव पहुंचे राजपाल यादव, बोले- जेलों में बने स्मोकिंग जोन

Rajpal Yadav Statement on Smoking Zone In Jail : राजपाल यादव तिहाड़ जेल से बाहर आ गए हैं। राजपाल ने जेलों में स्मोकिंग जोन बनाए जाने को लेकर बयान दिया है।

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राजपाल यादव ने जोलों में स्मोकिंग जोन को लेकर दिया बयान, PC- X

शाहजहांपुर : चेक बाउंस मामले में 30 दिन की अंतरिम जमानत पर बाहर आए बॉलीवुड अभिनेता और कॉमेडियन राजपाल यादव बुधवार को तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद सीधे अपने पैतृक गांव कुंडरा (शाहजहांपुर) पहुंचे। गांव में उनके स्वागत के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। मुलाकातों और बातचीत के बीच राजपाल ने जेल में बिताए समय को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा कि उनके लिए जेल 'सजा' से ज्यादा 'चिंतन का समय' रही। देश जब हर क्षेत्र में आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, तो जेल व्यवस्था में भी सुधार और अपग्रेड की जरूरत है। उनके मुताबिक सुधार गृहों को सिर्फ दंड की जगह नहीं, बल्कि व्यक्तित्व परिवर्तन के केंद्र के रूप में देखा जाना चाहिए।

नहीं छोड़ पा रहे सिगरेट की लत

स्मोकिंग जोन पर दिए बयान ने चर्चा छेड़ दी। राजपाल ने कहा कि वे धूम्रपान को बढ़ावा नहीं दे रहे, लेकिन जब देश में तंबाकू उत्पादों की बिक्री वैध है, तो जेलों में अलग स्मोकिंग एरिया बनाए जाने चाहिए, ताकि अन्य कैदी प्रभावित न हों। उन्होंने स्वीकार किया कि वे खुद भी इस आदत से जूझ रहे हैं और छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

अपने लोकप्रियता के अंदाज पर भी वे मुखर दिखे। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर उनके प्रशंसक हैं और बड़ी आबादी उन्हें नाम से पहचानती है। साथ ही खुद को भारतीय सिनेमा का जिम्मेदार कलाकार बताते हुए कहा कि वे कॉमेडी से लेकर गंभीर किरदार तक निभाने में सक्षम हैं। 'कला मेरे लिए विज्ञान की तरह है और मैं उसका विद्यार्थी हूं,' उन्होंने जोड़ा।

कभी नहीं करनी पड़ी काम की तलाश

गांव की मिट्टी से जुड़ाव पर भावुक होते हुए राजपाल बोले कि आटा, दाल, चावल और खेती-बाड़ी उनके जीवन की जड़ हैं। 30 साल के करियर में उन्हें कभी काम की तलाश नहीं करनी पड़ी, क्योंकि वे काम को 'जीते' हैं।

जेल सुधार पर उन्होंने एक और सुझाव रखा, अच्छे आचरण वाले सजायाफ्ता कैदियों को नए जीवन का अवसर मिलना चाहिए। उनका मानना है कि कम से कम कुछ प्रतिशत कैदियों को व्यवहार और संस्कार के आधार पर पुनर्वास का मौका देने पर गंभीर विचार होना चाहिए।

अंत में उन्होंने कहा, 'घृणा पाप से होनी चाहिए, पापी से नहीं।' उनके इस बयान ने एक बार फिर सजा, सुधार और व्यवस्था के संतुलन पर बहस को हवा दे दी है।