
Himanshu Shukla,
शाहजहांपुर। किशोर न्याय बोर्ड ने बचपन में किये गये अपराध पर तीन किशोरों को बालिग होने पर अनोखी सजा सुनाई है। सजा के तहत दो युवकों को दो-दो महीने तक और एक युवक को स्वास्थ्य केन्द्र में रोजाना चार घंटे श्रम करना होगा। किशोर न्यायालय द्वारा सुनाया गया ये फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल तीनों सजायाफ्ता युवक न्यायालय की आदेश का पालन कर रहे हैं।
22 पहले किया था अपराध
पुवायां थाना क्षेत्र के रहने वाले हिमाशुं ने वर्ष 1995 में अपने हमउम्र के दलित बच्चे को पीट दिया था। उस वक्त हिमांशु की उम्र आठ साल थी। जिस पर पीड़ित बच्चे के परिवार ने हिमांशु के खिलाफ थाने में मारपीट और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। जिसके बाद पुलिस ने कोर्ट में किशोर के खिलाफ चार्जशीट पेश कर दी। 22 साल बाद किशोर न्यायालय ने हिमांशु को दोषी करार दिया।
अस्पताल में सफाई करने की मिली सजा
किशोर न्याय बोर्ड की जज शिखा प्रधान ने हिमांशु को एक महीने तक पुवायां के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में साफ सफाई करने की सजा सुनाई है। आज उसकी उम्र 30 साल है। वहीं ऐसे ही दो अलग-अलग मामलों में भी कोर्ट ने सृजन और अनस नाम के दो युवकों को इसी स्वास्थ्य केंद्र में दो महीने तक रोजाना चार घंटे श्रम करने की अनोखी सजा दी है।
टाइम पर आते हैं तीनों आरोपी
पुवायां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉक्टर आनंद ने बताया कि जिला किशोर न्यायालय के आदेश पर हिमांशु से सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक और सृजल व अनस खां से शाम पांच बजे से आठ बजे तक कार्य लिया जाता है। तीन युवकों अपने तय वक्त पर अस्पताल आते हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी वीके सिंह ने कहा कि इस संबंध में उन्होंने सीएमओ को पत्र जारी कर दिया है।
नौकरी छोड़ भुगत रहे सजा
सजायाफ्ता हिमांशु की शादी हो चुकी है और उसके बच्चे भी हैं। हिमांशु एक टैक्सी ड्राइवर है, लेकिन अब वो 22 साल पहले किए गए गुनाह की सजा के तौर पर नौकरी छोड़ अस्पताल में सफाई कर रहा है। जिस वक्त इन युवकों ने अपराध किया था तब इन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा कि उन्हें जवानी में इसकी सजा भुगतनी पड़ेगी। फिलहाल हर कोई इस अनोखी सजा पर चर्चा कर रहा है।
Published on:
27 Dec 2017, 8:11 PM IST
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