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46.7 डिग्री की गर्मी में 10 साल की सादिया ने रखा पहला रोजा

बच्चों से लेकर 80 साल तक के बुजूर्ग रोजा रखकर कर रहे इबादत

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शाजापुर। सादिया ने पहला रोजा रखकर की इबादत।

शाजापुर.


तपती गर्मी भी खुदा की इबादत करने वालों का इरादा नहीं डिगमिगा रही है। यहीं यही वजह है कि 46.7 डिग्री तापमान में भी दिनभर 15 घंटे भूखे-प्यासे रहकर 10 के बच्चों से लेकर 80 वर्षीय बुजुर्ग तक रमजान के रोजे रख रहे हैं। मुस्लिम समाज का सबसे बड़ा व सबसे लंबा चलने वाला त्यौहार पाक माह रमजान हैं। रमजान माह की इबादत कई महीनों की इबादत से अफजल होती हैं। इस माह में रोजे का खास महत्व होता हैं। रोजा हर बालिग औरत, मर्द, बच्चे, बूढ़े पर फर्ज हैं। रोजेदारों के लिए उम्र की कोई बाधा नहीं हैं। वैसे तो इस्लाम के मुताबिक बच्चों को 10 वर्ष के बाद बालिग होने पर ही रोजा फर्ज होता हैं। लेकिन इस गर्मी में रोजा रखने वालों में मासूम बच्चों से लेकर 80 वर्ष तक के बुजूर्ग भी शामिल हैं। बच्चों में रोजा रखने की चाह इतनी ज्यादा रहती है कि परिजन के इंकार करने पर भी वह रोजा रखते हैं। इस भीषण गर्मी में भी बच्चें रोजा रखने को तैयार है और 15 घंटे भूखे-प्यासे रहकर रोजा रख रहे हैं। इसी तरह बुजूर्ग भी अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर होने के बावजूद रोजा नहीं छोड़ते।जमीअत उलेमा ए हिंद शहर सदर मुफ्ती अ. हमीद सा. ने बताया इस्लाम के मुताबिक रोजा 10 वर्ष के बाद बालिग पर ही फर्ज होता है, लेकिन बड़ों को देख बच्चे भी रोजा रखने की जिद करते हैं। जिससे ७-८ साल तक के बच्चे भी आसानी से रोजा रख लेते हैं।


शहर के मुगलपुरा स्थित सादिया पिता समद खान ने पहला रोजा रखा। रात को सेहरी करने के बाद परिजन व रिश्तेदारों के साथ सफक ने अपना रोजा शाम को मगरिब की अजान के साथ खोला और इफ्तार किया। सादिया ने बताया कि उसने पहला रोजा रखा, लेकिन उसे अधिक प्यास का अहसास नहीं हुआ। रोजा रखने से उसे बहुत खुशी हुई। अब हर साल इसी तरह रोजे रखकर खुदा की इबादत करूंगी। वहीं मुगलपुरा निवासी १० वर्षीय लबिजा इस रमजान पूरे रोजे रख रही हैं। लबिजा ने बताया कि उसने पिछले साल पहला रोखा रखा था और नियत की थी कि अगले साल पूरे रोजे रखूंगी। इस गर्मी में लबिजा हर दिन रोजे रखकर खुदा की इबादत कर रही है। इधर ८१ वर्ष फातिमा बी बुजुर्ग होने के बावजूद इस गर्मी में रोजे नहीं छोड़ रही हैं। खुदा की इबादत भरे जोश की साथ कर रही है और हर दिन रोजे रख रही हैं। वह रमजान माह के पूरे तीस रोजे रखती हैं। फातिमा बी ने बताया कि वह सालों से रमजान के पूरे रोजे रखती आ रही है, अब तबीयत खराब रहती है फिर भी रोजे नहीं छोड़ती। रोजे रखने के साथ ही पांचों वक्त की नमाज भी अदा करती हैं।

मछलियां करती है रोजेदारों के लिए दुआ
मुफ्ती अ. हमीद सा. ने बताया कि रोजा रखने वाले को अल्लाह सब्र देता है। यही वजह है कि बच्चे भी आसानी से रोजा रख लेते हैं। रोजे की नियत करने के बाद खुदा की इबादत में भूख-प्यास का अहसास नहीं रहता है। उन्होंने बताया कि रोजदारों के लिए समुद्र की मछलिया, चरिंदे-परिंदे, सेवानाद, नफातात सुबह पौ फटने से लेकर इफ्तार के वक्त तक दुआएं करते हैं। हदीस में यह भी बताया गया है कि इस माह में तीन इंसानों की दुआएं कभी खाली नहीं जाती। जिनमें इफ्तार के वक्त रोजेदार, दूसरा शख्स अदिल बादशाह (इंसाफ करने वाला) और तीसरा शख्स मजलूम हैं।


पूरे माह चलता है जकात व फितरो का दौर
पाक माह रमजान में जकात व फितरा दिया जाता हैं। जकात व फितरा गरीब, मजबूर, यतीम व बेवाओं को दिया जाता हैं, जो पूरे रमजान माह चलता हैं। इस माह में मोमिन इफ्तार के वक्त बनने वाले विशेष पकवान, कपड़े, पैसे देकर अपना हक अदा करते हैं। वहीं रमजान माह के आखिर में ईद-उल-फीतर पर बड़े जोश के साथ फितरा दिया जाता हैं।


छोटा चौक में हुआ इफ्तार
रमज़ान पर्व के चलते अनेक स्थानों पर रोजा इफ्तार का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान रोजा रखने वाले लोगों को इफ्तार कराया जाता है। रविवार को छोटा चौक पर एकता ग्रुप द्वारा सामूहिक रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया। इस दौरान अनेक रोजेदारों ने यहां पहुंचकर इफ्तार किया। साथ ही मुल्क अमन चैन की दुआ मांगी गई। इस दौरान सैयद वकार अली, शेख शाकिर बुशरा, दाऊद सेठ, मोहसिन मिजऱ्ा, शराफत शिशगर, भय्यू मशीन सहित अन्य उपस्थित थे।