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डाक्टर बोले-जारी करो डेथ सर्टिफिकेट, लेकिन एकाएक हाथ-पैर चलने लगे

बेरछा के पूर्व स्टेशन अधीक्षक का इंदौर के अस्पताल में उपचार जारी

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शाजापुर.ग्राम बेरछा के रेलवे स्टेशन के पूर्व अधीक्षक की तबीयत बिगडऩे पर उन्हें पिछले दिनों इंदौर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। सोमवार को इंदौर में ही दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया। यहां पर कुछ देर उपचार के बाद डॉक्टर ने देखा मरीज की धड़कन बंद हो गई है। जांच के बाद डॉक्टर ने परिजनों को मरीज की मौत की जानकारी देकर डेथ सर्टिफिकेट बनवाने की बात कही। परिजन इसे बनवाने में लगे और शव ले जाने के लिए एंबुलेंस के इंतजाम में लग गए। लेकिन 40 मिनट बाद डॉक्टर ने देखा तो मरीज की न सिर्फ धड़कन वापस आ गई, बल्कि मरीज ने हाथ-पैर हिलाने के साथ ही आंखें भी खोल ली।
बेरछा रेलवे स्टेशन के पूर्व अधीक्षक आरडी चौरसिया निवासी बेरछा की पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे हैं। इसी दौरान 8 जून शुक्रवार को तबीयत ज्यादा खराब होने पर परिजन इंदौर के निजी अस्पताल में ले गए। चौरसिया के भतीजे लोकेश चौरसिया ने बताया सोमवार को उसके चाचा आरडी चौरसिया को डायलिसिस के लिए इंदौर के भंडारी अस्पताल में शिफ्ट किया गया।
डॉक्टर ने मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने को कहा
इसी दौरान शाम करीब साढ़े 5 बजे डॉक्टर ने कहा अब कुछ भी नहीं बचा है। इनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लीजिए। ऐसे में आरडी चौरसिया के बेटे शेखर चौरसिया ने डॉक्टर से उनके पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने को कहा। डॉक्टर ने कहा प्रक्रिया में दो घंटे लगेंगे। इसके बाद शेखर पिता के शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करने में जुट गए। 40 मिनट बाद शेखर के पास फोन आया कि जल्द से हॉस्पिटल पहुंचे।
एकाएक हाथ-पैर हिलाने लगे पिता
अस्पताल पहुंचे शेखर से डॉक्टर ने कहा कि उनके पिता की धड़कन वापस चलने लगी है। जब शेखर ने जाकर देखा तो उनके पिता हाथ-पैर हिला रहे थे साथ ही उनकी आंखें भी खुल गई थी। लोकेश ने बताया पहले तो चाचा के निधन की खबर पता लगी। इसकी सूचना पूरे परिवार को हो गई, लेकिन करीब एक घंटे बाद ही उनके वापस जिंदा होने की जानकारी मिली। इससे पूरे परिवार ने राहत की सांस ली। पूरा परिवार अब भगवान से प्रार्थना कर रहा है कि वे जल्द से जल्द ठीक होकर घर लौट आएं।