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बधाई! आज पहले देशी भारतीय चीते का पहला जन्‍मदिन, देश में अब 27 हो गई चीतों की संख्या

मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में अब भारतीय चीतों की संख्या विदेशी चीतों से ज्यादा हो गई है...। शुक्रवार को भारत की जमीन पर जन्मे पहले चीते का जन्म दिन मनाया जा रहा है...।

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भारत की जमीन पर जन्मे पहले चीते के शावक का पहला जन्म दिन आज। सोशल मीडिया पर छाई खुशियां।

एक वक्त था जब भारत में चीते पूरी तरह से लुप्त हो गए थे। लेकिन 72 सालों बाद दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से चीते लाए गए और उन्हें मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में बसाया गया। यह सुखद खबर है कि अब भारतीय भूमि पर एक के बाद एक चीतों का जन्म हो रहा है। कूनो नेशनल पार्क में जन्मा चीता शुक्रवार को एक साल का हो गया। इसका जल्द नामकरण भी किया जाएगा। संभवतः केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव आज नामकरण भी कर सकते हैं। वहीं मध्यप्रदेश के कूनो में चीते का जन्म दिन मनाने की तैयारी की जा रही है।

देश में चीतों को फिर से बसाने की योजना के तहत दक्षिण अफ्रीका व नामीबिया से लाए गए चीतों को भारतीय हवा-पानी रास आने लगा है। अब भारत में जन्मे चीतों की संख्या विदेशी चीतों से ज्यादा हो गई है। वर्तमान में कूनो में जन्मे 14 शावक हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाए चीतों की संख्या 13 है। कूनो में जन्मा पहला चीता शुक्रवार (29 मार्च) को एक साल का हो जाएगा। संभावना है कि शुक्रवार को वन मंत्री भूपेंद्र सिंह शावक का नामकरण करें। वहीं प्रोजेक्ट चीता के तहत कूनो में 20 चीते लाए गए थे, जिनमें से 7 की मौत हो गई और 13 जीवित हैं।

इस बीच तीन मादा चीताओं ने अब तक चार बार में 17 शावकों को जन्म दिया। उनमें 14 जीवित हैं। कूनो में अब कुल 27 चीते हो गए हैं। कूनो में 68 दिन की अवधि में तीन मादा चीताओं ने 13 शावकों को जन्म दिया है। इनमें नामीबिया की आशा ने 3 जनवरी 2024 को तीन, 23 जनवरी को नामीबिया की ही ज्वाला ने चार और 10 मार्च को दक्षिण अफ्रीका की गामिनी ने छह शावकों को जन्म दिया है।

नामीबिया से लाई गई मादा ज्वाला ने नर पवन के साथ मेटिंग के बाद 29 मार्च, 2023 को चार शावकों को जन्म दिया था। मई में तीन की मौत हो गई। चौथे मादा शावक को अस्पताल में शिफ्ट किया। फूड सप्लीमेंट और बकरी का दूध पिलाकर उसका उपचार किया गया।

08 चीते लाए थे 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से
12 चीते लाए गए 18 फरवरी 2023 को द. अफ्रीका से
07 चीतों की मौत हो गई है अब तक इन 20 में से
13 वयस्क चीते हैं अभी (6 नर व 7 मादा) कूनो में
14 शावक है अभी कूनो नेशनल पार्क में
27 चीते हो गए कुल वयस्क और शावक मिलाकर

मध्यप्रदेश में कई आयोजन

कूनो नेशनल पार्क में जन्मा चीता शुक्रवार को एक साल का हो गया। इसका जल्द नामकरण भी किया जाएगा। संभवतः केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव आज नामकरण भी कर सकते हैं। इधर मध्यप्रदेश में चीता के पहले जन्म दिन पर कई आयोजन हो रहे हैं। लोग सोशल मीडिया पर भी अपनी शुभकामनाएं भेज रहे हैं। आप भी सोशल मीडिया पर संदेश देकर भारत में जन्मे पहले चीते को हैप्पी बर्थडे कहकर खुशी जाहिर कर सकते हैं।

एक नजर

एक छोटी सी छलांग में 80 से 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार में दौड़ सकता है।
इसी स्पीड से 460 मीटर तक लगातार दौड़ सकता है।
3 सेकंड में ही 103 की रफ्तार पकड़ लेता है। चीता शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द चित्रकायः से हुई है।
23 फीट की एक लंबी छलांग लगा सकता है।
दौड़ते वक्त आधे से अधिक समय हवा में रहता है।

मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों के लिए सुरक्षा, शिकार और आवास की भरपूर जगह है, जो इनके लिए उपयुक्त है। हर चीते के रहने के लिए 10 से 20 वर्ग किमी एरिया और उनके प्रसार के लिए पर्याप्त जगह होना चाहिए। यह सभी चीजें कूनो पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में मौजूद है।