24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कूनो में फिर गूंजी नन्हे चीतों की दहाड़, निर्वा ने दिया 5 शावकों को जन्म

Kuno National Park: कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर खुशी की खबर आई है। मादा चीता निर्वा ने पांच शावकों को जन्म दिया, जिससे पार्क में चीतों की संख्या बढ़ गई है।

2 min read
Google source verification
Female cheetah Nirva gave birth to five cubs in Kuno National Park mp

Kuno National Park: मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर रोमांचक खबर आई है। मादा चीता निर्वा ने रविवार को पांच नन्हे शावकों को जन्म दिया है। यह प्रदेश के चीता पुनर्वास कार्यक्रम की एक बड़ी सफलता है। नए शावकों के जन्म के साथ ही कूनो में चीतों की कुल संख्या 29 पहुंच गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी सोशल मीडिया पर इस उपलब्धि को साझा किया।

कूनो में बढ़ा चीतों का कुनबा

निर्वा, जिसे फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था, ने इस बार 5 शावकों को जन्म दिया है। इससे पहले पिछले वर्ष निर्वा के शावकों की मौत हो गई थी, लेकिन इस बार स्वास्थ्य निगरानी टीम की सख्त देखरेख में सभी शावक स्वस्थ हैं। अब कूनो नेशनल पार्क में 19 शावक और 10 वयस्क चीते हैं।

यह भी पढ़े - ‘एक के बदले 10 सिर लाकर दिखाएं मोदी सरकार…हम उनके साथ’, कांग्रेस के बड़े नेता ने किया ऐलान

मुख्यमंत्री ने जताई खुशी

सीएम मोहन यादव ने एक्स (ट्विटर) पर खुशी जताते हुए लिखा कि कूनो में चीतों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संरक्षण प्रयासों की सराहना करते हुए कूनो की पूरी टीम और वन्यजीव विशेषज्ञों को ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी। पोस्ट में नए शावकों का वीडियो भी साझा किया गया है।

पिछली बार शावकों ने नहीं देखी थी दुनिया

निर्वा ने इससे पहले भी 4 शावकों को जन्म दिया था, लेकिन उनमें से 2 की जन्म के दो दिन बाद ही मौत हो गई थी। इस बार पार्क प्रशासन और मेडिकल टीम ने पहले से ज्यादा सतर्कता बरती है ताकि सभी नन्हें शावक सुरक्षित रहें और कूनो की यह सफलता इतिहास में दर्ज हो। सालों पहले भारत से विलुप्त हो चुके चीतों को दोबारा बसाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीता रिइंट्रोडक्शन प्रोग्राम की शुरुआत की थी। कूनो की ये नई कामयाबी न सिर्फ इस प्रोग्राम की मजबूती का प्रमाण है, बल्कि देश की जैव विविधता की समृद्धि का भी संदेश देती है।