
यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो जल्द ही शहर के लोगों को रसोई गैस के लिए सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि अब शहर में पेयजल नल कनेक्शनों की भांति ही पाइप लाइन के जरिए रसोई गैस की भी सप्लाई की जाएगी। इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने राजस्थान स्टेट गैस लिमिटेड को जिम्मेदारी दी है, जिसके बाद कंपनी ने शहर का प्रारंभिक सर्वे शुरू कर दिया है। जिसमें कंपनी के कर्मचारी डोर-टू-डोर सर्वे कर लोगों के निशुल्क पंजीयन करते हुए अनुमति पत्र भरवा रहे हैं। ताकि जब पाइप लाइन बिछाई जाए, तब उपभोक्ताओं को बिना किसी अड़चन के कनेक्शन भी दे दिए जाएं।
राजस्थान स्टेट गैस लिमिटेड को जिम्मेदारी
बताया गया है कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड ने गत वर्ष प्रदेश के कुछ शहरों में पाइप लाइन से रसोई गैस की सह्रश्वलाई के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी, जिसमें श्योपुर भी शामिल है। श्योपुर शहर के इस प्रोजेक्ट का काम राजस्थान स्टेट गैस लिमिटेड को सौंपा गया है। यही वजह है कि अभी शहर में प्रारंभिक सर्वे किया जा रहा है। ये सर्वे 31 मार्च तक चलेगा, उसके बाद कंपनी काम शुरू करने की तैयारी कर रही है।
100 करोड़ से अधिक का होगा प्रोजेक्ट
पाइप लाइन से गैस सह्रश्वलाई के प्रोजेक्ट पर लगभग 100 करोड़ रुपए से अधिक का खर्च आने की संभावना है। बताया जा रहा है कि प्रोजेक्ट के तहत शहर के बाहर एक बड़ा गैस ह्रश्वलांट बनेगा और वहां से शहर में कॉलोनियों और मोहल्लों में पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इन पाइप लाइनों के माध्यम से शहर के लगभग 15 हजार से अधिक घरों में गैस की सह्रश्वलाई की जाएगी। नगरपालिका के आंकड़ों के मुताबिक शहर में लगभग 15 हजार से अधिक घर हैं, जिनमें गैस सह्रश्वलाई हेागी। वास्तविक घरों की स्थिति जानने के लिए ही है अभी डोर-टू-डोर सर्वे किया जा रहा है। इसके बाद धरातल पर काम शुरू होगा।
एलपीजी से सस्ती होगी
पीएनजी गैस कंपनी के अनुसार उपभोक्ता के घर सिलेंडरों में मिलने वाली एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) के स्थान पर पीएनजी (पाइह्रश्वड नेचुरल गैस) की सह्रश्वलाई की जाएगी। एलपीजी के मुकाबले ये नेचुरल गैस सस्ती और सुरक्षित होगी। कंपनी के मुताबिक इस में प्रेशर कम रहता है और हवा से भी हल्की होती है। यही नहीं सुरक्षा के लिए पाइप लाइन से लेकर रसोई गैस के चूल्हे तक दो-तीन वॉल्व लगाए जाते हैं, जिससे लीकेज की स्थिति में कोई भी तत्काल बंद कर सकता है। इसके साथ ही इसमें उपभोक्ता को स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर के हिसाब भुगतान करना हेाता है। बताया जा रहा है कि शहर में पाइप लाइन से गैस की सह्रश्वलाई मिलना शुरू होने के बाद उपभोक्ता को गैस सिलेंडर लाने ले जाने, खाना बनाते समय गैस खत्म होने जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा, साथ ही सस्ती भी पड़ेगी और दो माह में बिलिंग होगी।
फैक्ट फाइल
- 5-किलोमीटर के दायरे में फैला है शहर
-5-हजार से अधिक घर हैं शहर में
-1-लाख की आबादी है शहर में
- 23- वार्ड हैं श्योपुर शहर में
- 100- करोड़ रुपए के आसपास होगी प्रोजेक्ट की लागत
Updated on:
19 Feb 2024 08:16 am
Published on:
19 Feb 2024 08:15 am
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