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मानव स्वास्थ्य और फसलों के लिए घातक हो रही गाजर घास

कृषि विशेषज्ञ बोले-जल्द उपाय नहीं हुए तो जिले में जमीनों को अनुपजाऊ कर देगी ये खरपतवार, मैक्सीकन वीटल कीड़े को बताया कारगर उपाय

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Shyamendra Parihar

Aug 30, 2016

carrot grass

carrot grass

श्योपुर।
यूं तो फसलों में कई तरह की खरपतवार होती हैं, लेकिन गाजरघास प्रजाति नाम की खरपतवार न केवल फसलों और जमीन को नुकसान पहुंचा रही है बल्कि मानव और मवेशियों के लिए भी घातक साबित हो रही है।

हालांकि गाजर घास के नियंत्रण के लिए रासायनिक दवाओं का भी प्रयोग किया जा सकता है,लेकिन इससे फसलों को भी नुकसान पहुंचता है, यही वजह है कि कृषि विभाग के अधिकारी मेक्सीकन वीटल नामक कीड़े को जिले में लाने की वकालत करते हैं और शासनस्तर पर पत्र लिख चुके हैं।

बताया गया है कि 60 के दशक में अमेरिका से आई गेहूं की खेप पीएल 480 के साथ खरपतवार के बीज के रूप में गाजर घास आई और तब से लगातार ये फेल रही है। हमारे श्योपुर जिले में ही खेतों और जंगल से लेकर रहवासी इलाकों में गाजरघास फेल गई है,जिसके दुष्प्रभाव भी दिखने लगे हैं।

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक गाजर घास के संपर्क में आने से मनुष्यों में चर्म रोग, एग्जिमा, खुजली, एलर्जी, दमा, खांसी, जैसी बीमारियां हो सकती है, वहीं पशुओं में आंतों का अल्सर, बाल झडऩा, दूध में कड़वाहट आदि तरह की समस्याएं हो सकती हैं। वहीं फसलों और कृषि भूमि में तो दुष्प्रभाव है ही।

कृषि एसडीओ बोले-मंगवाया जाए मेक्सीकन वीटल

कृषि विभाग के एसडीओ एसके शर्मा का कहना है कि यूं तो गाजर घास के नियंत्रण के लिए रासायनिक विधि भी है, लेकिन इससे फसलों को भी नुकसान हो सकता है। इसलिए जिले में इसके नियंत्रण के लिए जाइमोग्राम बाइकोलोराटा (मेक्सीकन वीटल) नामका कीड़ा काफी उपयोगी होता है।

क्योंकि इस कीड़े का मुख्य भोजन गाजरघस है और इसे पूरी तरह साफ कर देता है। चूंकि ये कीड़ा श्योपुर में नहीं मिलता है बल्कि इसे अन्य जिलों से मंगाया जा सकता है। हम भी इसके लिए प्रयास कर रहे हैं, ताकि ये कीड़े मंगवाकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में छुड़वा दिए जाएं और जिले से गाजरघास समाप्त हो जाए।