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नए साल के जश्न के बीच महिला ने उड़ाए पुलिस के होश, अधिकारी बोले-शांति बनाए रखें तो दो टूक मिला जवाब

New Year Protest: नए साल के जश्न के बीच एक महिला ने भूख हड़ताल शुरू की। सीधे प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने यह फैसला लिया?

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नए साल पर महिला ने की भूखहड़ताल

New Year Protest: नए साल की खुशी में जहां सब लोग जश्न मनाने में व्यस्त रहते हैं और पार्टी करते हैं, वहीं दिल्ली एनसीआर में मेकिंग मॉडल गुरुग्राम संस्था की संस्थापक गौरी सरीन ने नए साल की शुरुआत भूख हड़ताल से की। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर जनता एक बार फिर आवाज उठा रही है। उन्होंने बुधवार शाम को प्रशासन और सरकार से सवाल कर उन्हें कटघरे में खड़ा किया। उनके इस विरोध में लगभग 100 लोगों ने साथ दिया। यह विरोध इस ओर इशारा कर रहा है कि अब सरकार को प्रदूषण के खिलाफ सख्त कदम उठाने ही होंगे, क्योंकि यह भूख हड़ताल साफ हवा और जिम्मेदार शासन के खिलाफ आवाज बनकर सामने आई है।

नए साल पर क्यों किया विरोध?

गौरी सरीन ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर इस बार नए साल का स्वागत अलग तरीके से करने का सोचा। उनका कहना है कि आज का ही दिन है जब लोग सबसे ज्यादा जश्न मनातें हैं औ जीवन में नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ते हैं और ऐसे में उन्होंने मौजूदा हालातों को लेकर सवाल खड़ा करना सही समझा, ताकि एक संदेश के साथ नए साल का स्वागत किया जा सके। उन्होंने कहा कि बीते कुछ समय से हवा की गुणवत्ता इतने खराब स्तर पर पहुंच गई है कि लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ा है और सांस लेने से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ा है। प्रदर्शन के दौरान लोगों से अपील की गई कि वे शांति बनाए रखें, मास्क पहनें और किसी भी तरह की नारेबाजी या राजनीतिक गतिविधि नहीं करें। विरोध करते हुए लोगों ने साफ कहा कि यह विरोध किसी के खिलाफ नहीं है बल्कि साफ हवा और स्वस्थ जीवन के हक के लिए है।

प्रशासन पर उठाए सवाल

सरीन ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि हालांकि प्रशासन ने ग्रैप-1, ग्रैप-2 जैसे नियमों को लागू किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर देखा नहीं गया। इन नियमों के बावजूद लोगों को प्रदूषण से राहत नहीं मिली है। आगे उन्होंने कहा कि दिल्ली में फिर भी कि किसी हद तक जवाबदेही है, लेकिन हरियाणा के की इलाकों के तो हालात बहुत बेकार हैं। उन्होंने बताया कि पिछले तीन सालों से मुख्य सड़कों जैसे एसपीआर, बड़े बाजारों और हैमिल्टन रोड पर जगह-जगह धूल के ढेर पड़े हुए हैं, जिन्हें कभी ढका तक नहीं गया है। लोगों ने कई बार प्रशासन और पर्यावरण मंत्री से शिकायत की, लेकिन किसी ने भी इस समस्या पर ध्यान ही नहीं दिया। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि साल 2023 में एक बैठक में नागरिकों ने एक प्लान बनाकर दिया था, लकेिन वह प्लान कागजों तक ही सीमित रह गया। हाल ही में GMDA के नए अधिकारी से बातचीत के बाद थोड़ा काम शुरू हुआ था, लेकिन वह भी आधा अधूरा ही रह गया। इस वजह से आज तक एसपीआर प्रदूषण का एक हॉटस्पॉट बना हुआ है।

इस पर विशेषज्ञों का क्या कहना है?

पर्यावरण विशेषज्ञ वैशाली राणा ने कहा कि ऐसा आंदोलन आज के समय में बहुत जरूरी बन गया है। आगे उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण अब एक पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है। यह अब सीधे-सीधे लोगों की हेल्थ पर एक संकट बन गया है। सरकार की जवाबदेही और ठोस कदम उठाने के लिए ऐसे आंदोलन बहुत जरूरी हैं। DXPGDA के संयुक्त संयोजक सुनील सरीन ने कहा कि लोग विकास के खिलाफ नहीं हैं, वे बस रहने लायक शहर की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए कि पर्यावरण पर कोई असर नहीं पड़े। यह इतना गंभीर मामला है कि इस पर किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। सरीन ने साफ कहा कि हम यहां अहसान नहीं मांग रहे हैं, हम सिर्फ साफ हवा में सांस लेने के हक की मांग कर रहे हैं। उनका कहना था कि साल 2026 को जवाबदेही और जागरूकता का साल बनाया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर भविष्य मिल सके।