
आज के दौर में चुनावों के समय राजनीतिक पार्टियों के टिकट पाने के जहां लोग तमाम जतन करते हैं और जब टिकट कट जाता है तो अपनी ही पार्टी से बगावत पर उतर आते हैं, लेकिन एक वो दौर भी था, जब टिकट पाने की लालसा तो दूर लोग पार्टी की ओर से आगे से मिलने वाले टिकट को भी लौटा देते थे। कुछ ऐसा ही अनुकरणीय उदाहरण है श्योपुर विधानसभा का, जहां समाजसेवी हुकुमचंद सर्राफ ने टिकट लेने से इंकार कर दिया और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का काम देखने और समाजसेवा करने की बात कही।
बताया जाता है कि वर्ष 1975 में देश में लगे आपातकाल के बाद वर्ष 1977 में जब विधानसभा चुनाव हुए तो टिकट वितरण की बारी आई। इस दौरान श्योपुर विधानसभा के लिए जब जनसंघ से टिकट देने की बात आई तो पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय स्वयं संघ से जुड़े और वरिष्ठ समाजसेवी हुकुमचंद सर्राफ का नाम सुझाया। यही वजह है कि जनसंघ की नेता राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने उनको बुलाया और जनसंघ के टिकट पर चुनाव लडऩे के लिए कहा। लेकिन हुकुमचंद सर्राफ ने टिकट लेने और चुनाव लडऩे से इंकार कर दिया। सर्राफ ने कहा कि मैं राजनीति में नहीं आना चाहता, मैं तो ऐसे ही समाजसेवा करता रहूंगा और आरएसएस का काम करूंगा।
फिर सरदार गुलाब सिंह को मिला टिकट
चुनाव लडऩे से इंकार करने के बाद राजमाता ने उनसे किसी दूसरे प्रत्याशी का नाम पूछा तो सर्राफ ने सरदार गुलाब ङ्क्षसह का नाम बताया। यही वजह रही कि 1977 के विधानसभा चुनाव में श्योपुर से सरदार गुलाब सिंह जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते। इस दौरान सर्राफ ने सरदार गुलाब सिंह की चुनाव के दौरान आर्थिक मदद भी की।
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का ओबीसी गुणगान...
मुरैनाञ्चपत्रिका. बिहार में हुई जातिगत जनगणना के आंकड़ों में काफी विसंगति है, जिसकी वजह से वहां जातिगत जनगणना के आंकड़ों पर बवाल मच रहा है। भाजपा जातिगत जनगणना के खिलाफ नहीं है लेकिन यह काम ठीक से होना चाहिए। यह बात केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मुरैना में मीडिया से चर्चा में कही।उन्होंने मप्र के कांग्रेस नेतृत्व पर हमला बोलते हुए कहा कि मप्र कांग्रेस में कपड़ा फाड़ राजनीति चल रही है। वह अपने अंदर के विरोध को ही शांत कर लें। भाजपा इस बार मप्र-राजस्थान और छग में पूरे बहुमत से सरकार बनाएगी और तेलंगाना में भी दूसरी पार्टियों का मुकाबला हमसे है। राजनीतिक पार्टियों के चंदे की जानकारी मांगने से क्या होगा: राइट टू नो अधिनियम के तहत जनता को प्रत्याशी की संपत्ति, आपराधिक ब्यौरा, बैंक ऋण आदि जानने का हक है। लेकिन राजनैतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे का स्त्रोत व अन्य डिटेल जानने से क्या होगा। मामला सुको में चल रहा है, इसलिए मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।
Updated on:
02 Nov 2023 10:21 am
Published on:
02 Nov 2023 10:17 am
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