
Kuno National Park
श्योपुर। कूनो नेशनल पार्क में चीते आने के बाद अब संरक्षित क्षेत्र में बसे गांवों के लोग चीता संरक्षण के लिए तैयार हैं। चितारा और कांकरा गांव के लोगों ने वनक्षेत्र को बचाने संकल्प लिया है कि पशुपालक हों या सामान्य रहवासी, कोई भी जंगल में कुल्हाड़ी लेकर नहीं जाएगा। जंगल में कुल्हाड़ी लेकर जाने पर प्रतिबंध गांव के लोगों ने स्वप्रेरणा से लगाया है ताकि जंगल सुरक्षित रहें। इसके बाद भी अगर कोई ग्रामीण जंगल में कुल्हाड़ी के साथ नजर आया तो गांव की समिति उस पर 11 हजार रुपए जुर्माना लगाएगी।
चीता और वन दोनों के संरक्षण का उपाय
दरअसल कूनो के बफर जोन में चितारा और कांकरा गांव गुर्जर बाहुल्य हैं। चीता प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद ग्रामीणों ने लगातार बैठक की हैं। इसके बाद चीता और वन दोनों के संरक्षण का बीड़ा उठाया है। ग्रामीणों की एक समिति की गठित हुई है। समिति ने किसी भी व्यक्ति, पशुपालक को जंगल में कुल्हाड़ी लेकर जाना प्रतिबंतिधत कर दिया है। समिति की हर माह बैठक होती है। अभी तक आठ लोगों पर जुर्माना लगाया जा चुका है। वसूली गई जुर्माना राशि समिति के खाते में जमा कराई जाती है और गांव में सार्वजनिक और जनहितैषी कार्य में उपयोग की जाएगी। यदि दूसरे गांव का व्यक्ति इस क्षेत्र में पेड़ काटता मिला तो उसे ग्रामीण पकड़कर वन विभाग के सुपुर्द भी करेंगे।
ताकि जंगल बचा रहे...
पीके वर्मा, डीएफओ, कूनो नेशनल पार्क, श्योपुर का कहना है कि चितारा गांव में ग्रामीणों ने वनसंरक्षण की दिशा में पहल की है और जंगल में कुल्हाड़ी प्रतिबंधित करते हुए 11 हजार रुपए के जुर्माना का प्रावधान किया है। चितारा और कांकरा गांव कूनो नेशनल पार्क के बफर जोन में है।
Published on:
17 Jan 2023 05:43 pm
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