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कहीं सेहत न बिगाड़ दे  जायका

जायकेदार और चटपटे व्यंजनों में किया जा रहा अमानक स्तर के सामान का प्रयोग

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Shyamendra Parihar

Jun 21, 2016

sheopur

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श्योपुर.
वाह क्या स्वाद है। एकदम चटपटा और लाजवाब। यह वाक्य आमतौर पर स्ट्रीट फूडस के स्वादिष्ट और चटपटे व्यंजन के सेवन के बाद सुनने को मिल सकती है। लेकिन यह टेस्ट हमारी सेहत के लिए कितनी नुकसानदेह है। हम इस चीज से हमेशा अनभिज्ञ रहते हैं। आम आदमी तो जायका और स्वाद की चाह में इस और आसानी से आकर्षित हो जाता है। लेकिन इसकी गुणवत्ता की पड़ताल के लिए अब भी कोई जिम्मेदार सजग नहीं हुए।

शहर के प्रमुख बाजारों में इन दिनों स्ट्रीट फूड्स कार्नरों की भरमार देखी जा सकती है। जहां जायकेदार और चटपटे व्यंजनो का बड़ी संख्या में शहरवासी सेवन करते हैं। वहंी कुछ स्थानों पर आम जिंदगी में स्वल्पहार के तौर पर उपयोग किए जाने वाले पदार्थों के निर्माण में भी अमानक स्तर के सामान का प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन खाद्य एवं औषधि निरीक्षक अमले का ध्यान पैकेज्ड फूड, और पारंपरिक निरीक्षण और सैंपल प्रक्रिया से बाहर नही निकल पा रहा है।

सेहत का रखें ध्यान

शहर मे चाउमीन, पाव भाजी, पानी पताशे, सहित अन्य खाद्य पदार्थों के निर्माण में स्वाद को मजेदार बनाने के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले पदार्थ सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो रहै हैं। प्राकृतिक खाद्य पदार्थों के नाम पर कृत्रिम खाद्य पदार्थांे का उपयोग हो रहा है।

खुली खाद्य सामग्री को कहें न

शहर मे धड़ल्ले से बैची जा रही खुली खाद्य सामग्री मे अमानक स्तर के पदार्थों के उपयोग के साथ ही निर्माण के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की अनदेखी की जाती है।खाद्य अधिकारी के अनुसार दुकान संचालको को निर्माण के दौरान उचित गुणवत्ता के कच्चे अच्छे सामान और साफ पानी के साथ ही स्वच्छता के लिए हैंड ग्लब्स और कैप का प्रयोग करना चाहीए । लेकिन यहां ऐसा नही है।

इन बीमारीयों का रहता है खतरा

खाद्य पदार्थों में पेस्टीसाईड्स मिलावट से शरीर की पाचन क्रिया और लीवर पर प्रभाव होता है। मिठास बढ़ाने के लिए प्रयुक्त सेकरिन से युरिनरी ब्लाडर का कैंसर, प्रीजरवेटिव से आंतों का केंसर हो सकता है। साथ ही मसालों मे मिलावट के कारण एसीडिटी और अमाशय पर प्रभाव हो सकता है। खाद्य पदार्थों के निर्माण के दौरान खराब पानी के प्रयोग से उल्टी,दस्त, हैजा और टाईफाईड जैसी बीमारीयां होने का खतरा रहता है।

बारिश में बड़ जाती है खाद्य पदार्थों की मांग

जिले में प्री-मानसून ने दस्तक दे दी है। लेकिन खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदारों ने अच्छी क्वालिटी का सामान उपयोग करने की कोईतैयारी नहीं की है। लोगों द्वारा बरसात के मौसम में पिकनिक मनाने मौज मस्ती करने घूमने के लिए पर्यटन स्थलों पर जाते हैं। जहां वह बाजार से नास्ता व अन्य खाद्य पदार्थ खरीदकर ले जाते हैं। खाद्य पदार्थों की मांग बढऩे के साथ ही उनमे घटिया क्वालिटी का सामान मिला दिया जाता है। जिससे मुनाफा भी अधिक होता है। और सामान भी ज्यादा बिक जाता है। साथ ही पर्यटन स्थलों पर लगने वाले चाट नास्ते के ठेलों की भी भीड़ लग जाती है। लेकिन उनमें बिकने वाले खाद्य पदार्थांे मे कितनी अच्छी क्वालिटी है। और यह किस ढंग से बनाई गई है। यह बात कोई नहीं जानता बस लोगों को इसी तरह ठगकर उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ किया जाता है।

मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले पदार्थों की सैंपलिंग ही नहीं की जाती, बल्कि ऐसा न किया जाए। इसके लिए दुकानदारों को समझाया भी जाता है। शीघ्र ही शहर में फिर कार्रवाई करेंगे।

आरके शिवहरे, खाद्य निरीक्षक, श्योपुर