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Kuno National Park: कूनो में चीतों की मौत ने बढ़ाई टेंशन ! गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे चीते

भीषण गर्मी के बीच अब चीतों को सुरक्षित रख पाना मुश्किल हो रहा है....

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Kuno National Park

शिवपुरी। प्रदेश में मौसम भले ही बदल रहा हो, लेकिन पिछले दिनों पड़ी भीषण गर्मी से कूनो नेशनल पार्क के चीते और शावक बेहाल हो गए थे। यही वजह है कि तीन शावकों की मौत हो गई। सीसीएफ उत्तम कुमार ने बताया कि नामीबिया के जंगलों में इतनी गर्मी नहीं पड़ती। कूनो में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच अब चीतों को सुरक्षित रख पाना मुश्किल हो रहा है। इसके चलते इन्हें शिफ्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

नामीबिया में पारा 43 डिग्री तक रहा

सीसीएफ ने बताया कि 23 मई को कूनो में तापमान 46-47 डिग्री था, जबकि नामीबिया में तापमान 42-43 डिग्री तक ही रहता है। नामीबिया में मई-जून में सर्दी का मौसम रहता है। चीतों को जब सितंबर में वहां से लाया गया, तब वहां गर्मी का मौसम था। यहां आने पर कुछ दिन राहत के बाद फिर गर्मी का मौसम शुरू हो गया। कूनो नेशनल पार्क में चीतों को लाने से पहले विशेषज्ञों की टीम ने यहां का पूरा जायजा लिया था, इसके बाद ही प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी। तब यहां की गर्मी पर विचार क्यों नहीं किया गया।

6 चीतों की हो चुकी है मौत

अफ्रीका से लाए गए चीतों में से अब तक 6 की मौत हो चुकी है। लगातार यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि आखिर चीतों की मौत का कारण क्या है। सुप्रीम कोर्ट भी चीतों को कहीं और शिफ्ट करने की बात कह चुका है। चीतों को नवंबर महीने के पहले मंदसौर केगांधी सागर सैंक्चुरी में बसाने की कोशिश की जाएगी।

जानकारी के लिए बता दें कि कूनो नेशनल पार्क में पिछले 2 महीनों के भीतर तीन शावकों सहित 6 चीतों की मौत हो चुकी है। एक शावक अभी भी बीमार है। ज्वाला चीते ने मार्च के महीने में 4 शावकों को जन्म दिया था। तब वन विभाग के जिम्मेदारों ने सभी शावकों के पूरी तरह से स्वस्थ होने की बात कही थी लेकिन, जब 23 मई को शावक मौत हुई तो अधिकारियों ने प्रेस नोट जारी कर सफाई दी। अधिकारियों ने कहा कि मरने वाला शावक जन्म से ही बेहद कमजोर था।उन्होंने कहा कि इस तरह के शावक बहुत कम जिंदा रह पाते हैं।

भारत कब लाए गए थे चीते

चीतों का पहला जत्था पिछले साल सितंबर के महीने में नामीबिया से भारत आया था. जिसमें आठ चीते शामिल थे और इन्हें 17 सितंबर को पीएम मोदी ने अपने जन्मदिन के अवसर पर कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था. इसके बाद इसी साल फरवरी में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए थे और उन्हें भी कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया था.