
शिवपुरी जिले की पोहरी विधानसभा से पुराने कांग्रेस नेता प्रद्युम्न वर्मा ने बसपा का दामन थाम लिया। चुनाव मैदान में प्रद्युम्न के आते ही पोहरी में अब मुकाबला त्रिकोणीय हो गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले दो चुनाव में बसपा के भरोसे दूसरे नंबर पर रहने वाले कैलाश कुशवाह इस बार कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर किस्मत आजमा रहे हैं।
यहां बदले चेहरे
पोहरी विधानसभा से इस बार जो तीन बड़े नेता चुनाव मैदान में हैं, उनमें एक समानता जरूर है कि तीनों ने अपने पुराने दलों को छोडकऱ नए दल में प्रवेश किया है। भाजपा से प्रत्याशी बने सुरेश धाकड़ (राठखेड़ा) ने वर्ष 2018 का चुनाव कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर जीता था, लेकिन वर्ष 2020 में हुए उपचुनाव में वो कांग्रेस को छोडकऱ भाजपा में आ गए थे। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी बने कैलाश कुशवाह, पहले भाजपा नेता थे और उसके बाद वर्ष 2018 एवं 2020 के उपचुनाव में बसपा से चुनाव लडकऱ दूसरे नंबर पर रहे, अब वो कांग्रेस में आ गए। वहीं तीसरे प्रत्याशी प्रद्युम्न वर्मा ने भी कांग्रेस छोडकऱ बसपा को चुन लिया।
पोहरी में जातिगत समीकरण हावी
पोहरी विधानसभा में 243698 मतदाता हैं, जिनमें सबसे अधिक लगभग 50 हजार धाकड़, लगभग 35 हजार आदिवासी, कुशवाह लगभग 30 हजार, जाटव लगभग 28 हजार, 17 हजार यादव, ब्राह्मण लगभग 10 हजार हैं। धाकड़ बाहुल्य होने की वजह से यहां से धाकड़ या ब्राह्मण विधायक चुने गए।
Updated on:
24 Oct 2023 09:34 am
Published on:
24 Oct 2023 09:32 am
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