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Cyclist Asha Malviya : भारत यात्रा पर निकली आशा मालवीय पहुंची बदरवास, हुआ जोरदार स्वागत

- पर्वतारोही आशा मालवीय का शानदार स्वागत- साइकिल से तय कर रही हैं 25 हज़ार कि.मी यात्रा- शहरवासियों ने पुष्पवर्षा कर किया जोरदार स्वागत- महिला सशक्तिकरण का संदेश लेकर कर रही यात्रा

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Cyclist Asha Malviya reach badarwas

Cyclist Asha Malviya : भारत यात्रा पर निकली आशा मालवीय पहुंची बदरवास, हुआ जोरदार स्वागत

संजीव जाट

देशभर के अलग-अलग 28 राज्यों की 25 हजार किलो मीटर की यात्रा पर निकली आशा मालवीय शुक्रवार को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के अंतर्गत आने वाले बदरवास पहुंची। यहां शहरवासियों ने आशा का जोरदार स्वागत किया। साथ ही, उनके हौसले और कार्य की सराहना भी की। आपको बता दें कि, आशा मालवीय ने महिला अधिकारों और महिला सशक्तिकरण की जागरुकता फैलाने के लिए इस साइकिल यात्रा की शुरुआत मध्य प्रदेश स्थापना दिवस यानी 1 नवंबर 2022 से की है जो अब भी लगातार जारी है।

बता दें कि, आशा मालवीय एक नेशनल लेवल पर्वतारोही भी हैं। फिलहाल, ये साइकिल पर महिला सुरक्षा, महिलाओं अधिकारों और महिला सशक्तिकरण की जागरूकता फैलाने बढ़ाने के लिए पूरे भारत यात्रा पर हैं। 1 नवंबर 2022 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से उन्होंने इस यात्रा की शुरुआत की है। बदरवास पहुंची आशा ने अपनी यात्रा के दौरान असम यात्रा को सबसे खास बताया। उन्होंने कहा कि, वहां की जनता के उनका शानदार स्वागत किया। असम पहुंचने से पहले वो चार राज्यों को पार कर चुकी हैं।

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आशा की कहानी

राजगढ़ के खिलचीपुर तहसील के छोटे से गांव नाटाराम में रहने वाली 24 वर्षीय आशा मालवीय एक बेहद गरीब परिवार की बेटी हैं। 20 साल पहले पिता उनकी मां को कहीं छोड़कर चले गए। आशा की मां राजुबाई ने गांव के आसपास के लोगों के खेतों में मेहनत मजदूरी कर आशा को पढ़ाया लिखाया। कक्षा 5 तक आशा ने गांव में पढ़ाई की, फिर आगे की पढ़ाई 5 किलोमीटर दूर छापीहेड़ा से की। पढ़ाई के लिए रोज आशा पैदल 5 किलोमीटर दूर आना जाना करती थी। आशा बताती हैं कि, उसकी लगन मेहनत देख पढ़ाई के लिए उसको आर्थिक के साथ साथ हर तरह की मदद करने में आगर मालवा जिले के रिटायर्ड एसपी के रीडर ओमप्रकाश शर्मा का खास योगदान रहा। उन्हीं की मदद का नतीजा है कि, आज वो यहां तक पहुंच सकी हैं।


अब तक हासिल कर चुकी हैं ये उपलब्धियां

वैसे तो आशा पढ़ाई में ग्रेजुएशन कर चुकी हैं। लेकिन, बचपन से ही उनकी रुचि स्पोर्ट्स में रही है। आशा ने प्रशिक्षण के साथ ऐथलेटिक्स की 100 मीटर, 200 मीटर की दौड़ में भी भाग लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उपस्थिति दर्ज कराई है। आशा के इस जज्बे को देखते हुए जयपुर में हुए अखिल भारतीय बलाई महासभा के राष्ट्रीय महाअधिवेशन में बलाई गौरव रत्न अवार्ड से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।


जल्द साकार होने वाला है सपना

वहीं हाल ही में देश की सबसे बड़ी चौथी बुक ओएमजी बुक के फाउंडर प्रोफेसर डॉ. दिनेश गुप्ता ने उनकी बुक में आशा का नाम दर्ज किया है। राजगढ़ अपर कलेक्टर कमलचंद नागर ने आशा को रिकॉर्ड अवॉर्ड देकर खुशी व्यक्त की। इसके बाद आशा के मन में संपूर्ण भारत की साइकिल यात्रा करने विचार आया जो जल्दी ही साकार भी होने जा रहा है।