6 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

icon

प्रोफाइल

पिता की मौत के बाद मां भी छोड़ गई, भाई के लिए बहन निभा रही माता-पिता का धर्म

Rakshabandhan Special : पिता के निधन के बाद अपने दो मासूम बच्चों को बेसहारा छोड़कर मां ने कर ली दूसरी शादी। अब सिर्फ 17 वर्षीय बड़ी बहन निभा रही माता-पिता का फर्ज। खेत में मजदूरी कर छोटे भाई को पढ़ा-लिखाकर बनाना चाहती है अफसर।

3 min read
Google source verification
Rakshabandhan Special

फिर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की मिसाल बनी सोना (Photo Source- Patrika Input)

संजीव जाट की रिपोर्ट

Rakshabandhan Special : जो उम्र खेलने और पढ़ने की होती है। उसमें एक बहन खेतों में मजदूरी कर अपने छोटे भाई की पढ़ाई के साथ साथ अन्य जिम्मेंदारियां उठा रही है। पिता के निधन के बाद मां ने भी दूसरे शख्स से शादी कर ली। यही नहीं, अपने दोनों बच्चों को बेसहारा छोड़कर भी चली गई। तब से आज तक बहन ही अपने छोटे भाई के लिए मां और पिता दोनों बनकर जिम्मेदारी निबाने का हैरान कर देने वाला उदाहरण पेश करते हुए जीवन गुजार रही है।

ये कोई काल्पनिक कहानी या फिल्म की स्टोरी नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के अंतर्गत आने वाली बदरवास तहसील के ग्राम पंचायत सालोन स्थित बारईखेड़ा में रहने वाली महज 17 साल की सोना पटेलिया के जीवन की हकीकत है।

छोटे भाई को भी बड़ा अहसास

सोना पटेलिया ने पत्रिका से खास बातचीत में बताया कि, वो हर साल रक्षाबंधन का पर्व मनाती है और अपने भाई को राखी बांधती है। भाई का कहना है कि, मां-बाप के न होने पर वैसे तो उसकी बहन आज जिस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही है, वो जीवनभर भी एक पैर पर खड़े होकर अपनी बहन की आराधना करे तो उसका बदल नहीं दे सकता, लेकिन वो अपनी बहन के इन परिश्रमों और जिम्मेदारियों को अपने पूरे जीवन में याद रखेगा और बड़ा होकर सिर्फ इसलिए कुछ बनेगा ताकि, अपनी बहन के लिए कुछ कर सकेगा। उसने ये भी कहा कि, वो भी अपना पूरा जीवन बड़ी बहन की सेवा करता रहेगा।

छोटे भाई को बड़ा अधिकारी बनते देखना चाहती है बहन

वहीं, दूसरी तरफ सोना का कहना है कि, वो अपने भाई विकास को पढ़ा लिखाकर देश सेवा के किसी बड़े पद का अधिकारी बनते देखना चाहती हैं। सिर्फ इसी के चलते वो इस वक्त किसी भी प्रकार का परीश्रम उठाने में पछे नहीं हट रहीं। सोना का कहना है कि, वो जब सिर्फ 8 साल की थी, तभी से बिना माता-पिता के अपने भाई की हर जिम्मेदारी उठा रही है, ताकि छोटे भाई को कभी भी माता-पिता की कमी का अहसास न हो सके।

खुद नहीं कर सकी पढ़ाई

हालांकि, घर के पास ही उनके वृद्ध चाचा भी रहते है और वो भी थोड़ी बहुत मदद करते है, लेकिन घर का खर्च से लेकर भाई विकास की पढ़ाई की जिम्मेंदारी वो खुद मजदूरी करके उठाती हैं। सोना का कहना है कि, घर के हालात देखकर उसने तो पढ़ाई नहीं की, लेकिन वो दिन-रात मजदूरी कर अपने भाई को बड़ा अधिकारी बनाने के लिए सबकुछ कर रही है।

माता-पिता को याद कर छलके आंसू

रक्षाबंधन के पर्व पर हर बार दोनों भाई बहनों को अपने माता-पिता को याद कर रोने लगते है। सोना का कहना है कि, आज माता-पिता होते तो वो भी मजदूरी या काम करने की जगह पढ़ाई करती, लेकिन भाग्य को जो मंजूर था, वही आज वो कर रही है।