
स्कूल जाते छात्र फोटो सोर्स पत्रिका
उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को अब निजी स्कूलों में मुफ्त पढ़ाई का मौका मिलेगा। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत कक्षा 1 से 8 तक निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। जिन परिवारों की सालाना आय एक लाख रुपये से कम है। वे अपने बच्चों का आवेदन कर सकते हैं। और बेहतर शिक्षा का लाभ उठा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत प्राइवेट स्कूलों में भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इन सीटों पर चयनित बच्चों को पूरी तरह मुफ्त शिक्षा दी जाएगी। श्रावस्ती जिले के जिलाधिकारी का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य ऐसे बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराना है। जो आर्थिक तंगी के कारण निजी स्कूलों में पढ़ाई नहीं कर पाते। इस योजना के तहत कक्षा 1 से 8 तक बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि जिन परिवारों की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम है। वे इस योजना का लाभ ले सकते हैं। इसके अलावा कुछ विशेष श्रेणी के बच्चों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें एचआईवी या कैंसर से पीड़ित माता-पिता के बच्चे, अनाथ बच्चे (चाहे वे बाल गृह में रह रहे हों), गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले अंत्योदय कार्डधारकों के बच्चे, दिव्यांग, विधवा या वृद्धावस्था पेंशन पाने वाले अभिभावकों के बच्चे शामिल हैं।
प्रवेश के लिए बच्चों की उम्र भी निर्धारित की गई है। नर्सरी में दाखिले के लिए उम्र 3 से 4 वर्ष, एलकेजी के लिए 4 से 5 वर्ष, यूकेजी के लिए 5 से 6 वर्ष और कक्षा 1 के लिए 6 से 7 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आवेदन प्रक्रिया के लिए अभिभावक अपने क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। वहां से आवेदन पत्र प्राप्त कर उसे भरकर जमा करना होगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बच्चों का चयन किया जाएगा। प्रशासन की ओर से अभिभावकों से अपील की गई है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। ताकि उनके बच्चों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके और उनका भविष्य बेहतर बन सके।
Updated on:
21 Mar 2026 04:48 pm
Published on:
21 Mar 2026 04:47 pm
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