
सीधी. केंद्र सरकार ने भले ही आयुष्मान कार्ड से इलाज शुरू करा दिया है, लेकिन हजारों मासूमों के आयुष्मान कार्ड बन ही नहीं पा रहे हैं। वजह है कि अधिकांश के पास आधारकार्ड नहीं है। जन्म प्रमाण पत्र हैं तो फिंगरप्रिंट नहीं आ रहे। उन्हें कहां से इलाज की सुविधा मिलेगी यह बड़ा सवाल है।
हैरानी की बात तो यह है कि विभाग को यह नहीं ही पता कि कितने पात्र बच्चों के कार्ड बने हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्रों के आयुष्मान कार्ड बनाकर उन्हें पांच लाख तक की राशि का इलाज मुफ्त देने का प्रावधान है। छह साल पहले यह योजना शुरू की गई थी, लेकिन अब तक स्थिति सह है कि 0 से 6 साल तक के अधिकांश बच्चों के कार्ड नहीं बन सके हैं। वजह है कि उनके पास आधार कार्ड नहीं हैं। आधार कार्ड बन भी नहीं पा रहे। जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर प्रयास किए जाएं तो समस्या आती है।
आधार कार्ड की बाधा के चलते जब जिन बच्चों के आयुष्मान कार्ड नहीं बन पा रहे उन्हें पांच लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज कैसे मिलेगा। यह समस्या बनी हुई है। इसके लिए खासतौर से स्वास्थ्य विभाग के पास कोई योजना नहीं है। हैरानी की बात यह है कि इस बारे में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को कुछ भी पता नहीं।
जिम्मेदारों के पास नहीं योजना
आयुष्मान कार्ड बनाने का कार्य स्वास्थ्य विभाग का है। इसके लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अधिकारी जिम्मेदार हैं। कार्ड बनाने से लेकर लाभ दिलाने का जिम्मा भी स्वास्थ्य विभाग का है, लेकिन जिले के हालात कुछ अलग ही हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी इस काम पर ध्यान ही नहीं देते।
यही वजह है कि यह काम कलेक्टर को खुद ही अपने हाथ में लेना पड़ा।अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिससे आयुष्मान कार्ड बनाने की जिम्मेदारी है सारे कार्ड ऑनलाइन बनते हैं। सीधी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ. आईजे गुप्ता ने कहा कि आयुष्मान कार्ड बनाने का जिम्मा संबंधित निकायों को दिया है। काम चल रहा है। बच्चों के लिए भी अलग से प्रयास किया जाएगा।
Published on:
24 Aug 2022 07:55 pm
बड़ी खबरें
View Allसीधी
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
