
सीधी. सोन घड़ियाल सेंचुरी में बीते चार साल से घड़ियालों जीवन चक्र थमा हुआ है। जो बचे हुए हैं उन पर बाणसागर बांध गला घोंट रहा है। इस मामले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंभीर आपत्ति जताई थी और घड़ियालों के लिए नियमित तौर पर पानी छोड़ने के निर्देश दिए थे, लेकिन अफसरों की मनमानी जारी है।
बांध से पानी तभी छोड़ा जा रहा है जब बिहार सरकार की ओर से मांग आ रही है। इससे नदी का अनुकूलन प्रभावित हो रहा है। हालांकि अधिकारी दावा करते हैं कि पानी नियमित दिया जा रहा है।
गौरतलब है कि सोन घड़ियाल सेंचुरी का इलाका 210 किलोमीटर से ज्यादा है । लेकिन इसके ऊपरी हिस्से में बाणसागर बांध के निर्माण से पानी नहीं पहुंच रहा है। वहीं गुलाब सागर बांध बन जाने से सोन की सहायक नदियों का पानी भी नहीं आता है। अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा ने यह मामला एनजीटी के समक्ष उठाया था।
याचिका में उन्होंने बताया था कि सोन घड़ियाल सेंचुरी को रेत माफिया और बाणसागर बांध निगल रहा है। इस पर एनजीटी ने जल संसाधन विभाग से बांध से छोड़े जाने वाले पानी का डाटा मंगाया था और इस पर कड़े शब्दों में कहा था कि पानी पर पानी पर घड़ियालों का भी हक है और उनके लिए नियमित पानी छोड़ा जाना चाहिए। एनजीटी ने यह भी कहा था कि रहवास अगर प्रभावित होगा तो घड़ियालों को बचाना मुश्किल होगा।
Published on:
31 Oct 2021 03:32 pm
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