
बीएलओ स्कूल के बाद करेंगे चुनावी ड्यूटी
सीधी। स्कूल शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी ने शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने शिक्षकों को पूर्णकालिक रूप से अन्य गैर शैक्षणिक कार्यों पर लगाए जाने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी करते हुए यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस स्थिति में शिक्षक का वेतन आहरित नहीं किया जाएगा। जिन शिक्षकों की ड्यूटी फोटो निर्वाचक नामावली के कार्य में बीएलओ के रूप में लगी है वे भी स्कूल के बाद या अवकाश के दिनों में यह काम करेंगे। आदेश की अवहेलना करने पर संबंधित शाला प्राचार्य एवं डीईओ पर उत्तदायित्व निर्धारित किया जाएगा। ऐसा आदेश करने वाले गैर विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। प्रमुख संचिव स्कूल शिक्षा रश्मि अरुण शमी ने कलेक्टर, जिपं सीईओ सहित डीईओ को जारी आदेश में बताया है कि शिक्षण कार्य में लगे शिक्षकों को फोटो निर्वाचक नामावली का कार्य कार्यालयीन समय से पूर्व तथा कार्यालय समय के बाद एवं अवकाश के दिनों में करने के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के निर्देश हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक उपलब्ध है तो उन्हें भी बीएलओ नियुक्त किया जा सकता है।
आदेश का हवाला-
प्रमुख सचिव ने बीएलओ के नाम पर लगाई जाने वाली ड्यूटी के मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य में संलग्न करना प्रतिबंधित है। इन निर्णयों के बाद भी शिक्षकों को निर्वाचन संबंधी व अन्य गैर शैक्षणिक कार्यों में पूर्णकालिक रूप से लगाया गया तो अत्यंत आपत्तिजनक है। यह भी आपत्तिजनक है कि शिक्षकों को पूर्णकालिक रूप से गैर शैक्षणिक कार्यों में कलेक्टर कार्यालय के अधीनस्थ अधिकारियों, सब डिविजनल राजस्व अधिकारियों की ओर से आदेश जारी कर संलग्न किया जा रहा है। सीधी जिले के हर तहसील में इस तरह के मामले नजर आ रहे हैं।
अब यह होगी व्यवस्था-
प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने निर्देशित किया कि किसी भी शिक्षक को पूर्णकालिक रूप से गैर शैक्षणिक कार्य में बगैरम मप्र शासन स्कूल शिक्षा विभाग की अनुमति के पूर्णकालिक रूप से संबद्ध नहीं किया जाए। यदि शिक्षकों को मूल्यांक़ अथवा विभागीय कार्यालयों में भी पूर्णकालिक रूप से कार्य लिया जाता है तो यह निर्देशों के विपरीत माना जाएगा।
नहीं होंगे कार्यमुक्त-
पीएस ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर पूर्णकालिक रूप से शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य में संलग्न किया जता है तो भी संचालनालय लोक शिक्षण की अनुमति के बिना उन्हें कार्यमुक्त न किया जाए। ऐसे सभी शिक्षक जो पूर्णकालिक रूप से गैर शैक्षणिक काम में संलग्न हैं उनका वेतन भुगतान तत्काल प्रभाव से रोका जाए। उनकी शाला में उपस्थिति के बाद ही उन्हें वेतन का भुगतान किया जा सकेगा। किसी भी शिक्षक को अब पूर्णकालिक रूप से शाला से कार्यमुक्त नहीं किया जा सकेगा। आदेश के बाद भी अब अगर कोई शिक्षक संलग्न पाया जाता है तो संबंधित विद्यालय के प्राचार्य एवं संबंधित डीईओ का उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाएगा।
ट्राइवल छात्रावासों की ड्यूटी पड़ेगी भारी-
आदेश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग के ऐसे शिक्षक जो आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों में तैनात हैं और स्कूल जाने से परहेज कर रहे हैं उनका वेतन भी जारी नहीं होगा। अब इन छात्रावासों में उसी स्थान के विद्यालय के शिक्षक की ड्यूटी लगाई जाएगी और उसकी अनुमति संचालनालय से लेनी होगी। ऐसा नहीं होने पर उसका वेतन नहीं निकलेगा। ऐसे में अब शिक्षक को छात्रावास के साथ विद्यालय में अध्यापन कार्य नियमित तौर पर करना होगा।
Published on:
30 Oct 2019 07:15 pm
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