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बाणभट्ट समारोह: लोक कलाकारों ने गाए फगुआ और स्वागत गीत, दिखी नर्मदा-सोन नदी की प्रेमकथा

जिला प्रशासन के तत्वावधान में दो दिवसीय बाणभट्ट महोत्सव का समारोह पूर्वक रविवार को समापन हुआ।

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Banabhatta Festival in sidhi

Banabhatta Festival in sidhi

सीधी। कालिदास अकादमी उज्जैन, इंद्रवती नाट्य समिति और जिला प्रशासन के तत्वावधान में दो दिवसीय बाणभट्ट महोत्सव का समारोह पूर्वक रविवार को समापन हुआ। कार्यक्रम में विचार गोष्ठी एवं सांस्कृतिक आयोजन हुए। स्थानीय लोक कलाकारों द्वारा लोक कलाओं की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। मान्या पांडेय, नरेंद्र बहादुर सिंह, हरिश्चंद्र मिश्र द्वारा संस्कार गीत गाया गया।

नंद किशोर सिंह खरहना की टीम द्वारा फ गुआ, दल प्रताप सिंह की टीम द्वारा भगत, रघुवर कोल बघाड़ धवैया की टीम द्वारा शैला नृत्य, निवास साकेत अगहार टीम द्वारा चमरौंही एवं अहिराई नृत्य, मिरचाई लाल कोल एवं रामलाल गोंड अमिलई टीम द्वारा भगत की मनमोहक प्रस्तुति दी गई।
मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद सर्वेश सोनी, दिलीप पांडेय, एपी पटेरिया, अमित द्विवेदी, मृत्यंजय प्रभाकर, शिवशंकर मिश्र सरस ने बाणभट्ट के जीवन एवं काव्य रचनाओं पर प्रकाश डाला।

बतौर अतिथि पीएस त्रिपाठी उपायुक्त, मुख्य अतिथि केडी सिंह जनपद अध्यक्ष रामपुर नैकिन, आरपी त्रिपाठी तहसीलदार रामपुर नैकिन, विनोद चतुर्वेदी वन समिति अध्यक्ष, नंद कुमार बैश्य वन समिति सदस्य, संतोष शुक्ला, आशुतोष शुक्ला, रमेश चतुर्वेदी, अनुराग सिंह, बाबूलाल कुंदेर सहित बड़ी संख्या में कलाकार व स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। संचालन इंद्रवती नाट्य समिति के संरक्षक अखिलेश पांडेय ने किया।

नाटक चिरकुमारी का शानदार मंचन
समारोह के पहले दिन शहर के मानस भवन में देर शाम एक्सट्रीम आर्ट एंड एजुकेशनल सोसाइटी सीधी के कलाकारों ने रोशनी प्रसाद मिश्र द्वारा लिखित और निर्देशित नाटक चिरकुंवारी की मनमोहक प्रस्तुति दी। नाटक चिरकुंवारी नर्मदा नदी और सोन नदी की प्रेमकथा पर आधारित नाटक था। सुंदर दृश्यों और संगीत को देखकर दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए।

ये कलाकर रहे शामिल
बघेलखंड की लोक धुनों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी, बुंदेली, भोजपुरी, मैथिली और बुंदेली लोक धुनों का प्रयोग नाटक के संगीत को काफी प्रभावी बना गया। नाटक में मंच पर नरेंद्र सिंह, रजनीश, संतोष, सुनैना, अजीज़, राजा, पवन, उपेंद्र, दीप्ती, नीरज, अमित, प्रहलाद, पुष्पेंद्र, भारती, अनीता और मंच पर संगीत में सुभाष द्विवेदी, रोशनी प्रसाद और शिव बहादुर रहे, प्रकाश नीरज कुंदेर का रहा।