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मकर संक्रांति पर्व पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब, जानिए शहर में किन पवित्र नदियों में श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डूबकी

सोन, गोपद और महान नदी के विभिन्न घाटों पर लगा मेला

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Massacre of the great faith at Makar Sankranti

Massacre of the great faith at Makar Sankranti

सीधी. मकर संक्रांति पर सोमवार को सोन व गोपद नदी के विभिन्न घाटों में लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। सूर्य को अघ्र्य देकर गुड़तिल का दान किया। सर्वाधिक भीड़ शहर के करीब स्थित सोन नदी के गऊ घाट में देखी गई। यहां आयोजित मेले में करीब 75 हजार लोगों के पहुंचने का अनुमान है। इसी प्रकार सोन नदी के भंवरसेन, खैराघाट, कोलदह, जोगदहा घाट, खड़बड़ा, कुनझुन, सिरसी, भेलकी, बदरखाड़ा, मरसरहा, पडऱी, रामनगर, डांगा, छुही, विजयघाट, गोतरा मंदिर, बड़बाही गणेश बहादुर, बढ़ौरा व महान नदी के गोपालदासेश्वर घाट में भी मेला आयोजित किया गया। जहां बड़ी संख्या में लोगों ने स्नान-दान कर मंगलकामनाएं की।

बच्चों ने उठाया लुत्फ
युवाओं व बच्चों ने जमकर लुत्फ उठाया। यहां खान-पान की सामग्री व खिलौनी की खरीदारी के बाद झूलों का भी आनंद उठाया। मकर संक्रांति पर विशेष महत्व रखने वाले गन्ने का भाव आसमान पर रहा। फिर भी लोगों ने जमकर खरीदी की। मेले से लौटने वाले लोगों के हाथों में गन्ना जरूर दिखा। खासकर, महिलाओं व बच्चों में इसे लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।

गोतरा के अष्टभुजी दवी मंदिर में लगा मेला
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गोतरा अष्ठभुजी मंदिर के समीप गोपद नदी के किनारे मकर संक्रांति के पावन पर्व पर विशाल मेले का आयोजन हुआ। मकर संक्रांति के अवसर पर कुसमी क्षेत्र के लोग गोपद नदी में स्नान कर सूर्य भगवान को जल भी अर्पित किए, साथ ही माँ अष्ठभुजी देवी का दर्शन कर मेले में जमकर खरीददारी भी किए। पूरा बाजार मिठाई गन्ने और खिलौने से गुलजार था, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस की पैनी नजर रही। वहीं मंदिर समिति द्वारा व्यापक व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कुसमी टीआई आरडी द्विवेदी अपने दल बल के साथ सुबह से ही मेला स्थलों में मौजूद रहे। मंदिर समिति के अध्यक्ष दूलमनाथ गोस्वामी, सचिव दिनेश शुक्ला, उपाध्यक्ष रामलाल साकेत, व्यवस्थापक इंद्रप्रकाश गुप्ता, शिवमूरत विश्वकर्मा, राजेंन्द्र शुक्ला, रामसुशील, रमेश शुक्ला आदि व्यवस्थाओं में जुटे रहे। इसके साथ ही ठाड़ीपाथर एवं बड़वाही में भी मकर संक्रांति पर मेले का आयोजन किया गया।