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बालसभा में लिखी कुपोषण से मुक्ति की पटकथा, आमजन के सहयोग से बदली गांव की तस्वीर

आज पंचायतीराज दिवस पर चौहानन टोला को राष्ट्रीय स्तर पर मिलेंगे दो पुरस्कार  

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Model panchyat

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सीधी. मप्र के सुदूर इलाके में बसी ग्राम पंचायत पनवार चौहानन टोला जनहितैषी कार्यों के लिए ख्यात है। आज पंचायतीराज दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पंचायत को पुरस्कृत करेंगे। चौहान टोला पंचायत कभी कुपोषण व कु-प्रबंधन के लिए बदनाम थी, लेकिन सरपंच वीरेंद्र सिंह की सूझबूझ व सटीक रणनीति ने गांव दिशा व दशा बदल दी। बदलाव की शुरुआत स्कूल, आंगनबाड़ी व महिला स्व समूहों से की। वे बताते हैं कि कुपोषण से मुक्ति के लिए शासन स्तर से तमाम कार्यक्रम संचालित हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में जरूरतमंदों तक लाभ नहीं पहुंच पा रहा था। पंचायत की स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों में हर सप्ताह बालसभा आयोजित कर बच्चों व उनके अभिभावकों को जागरूक करने की पहल शुरू की। गीत-संगीत, रंगोली, अंताक्षरी, डांस, कैरम व अन्य गतिविधियों के जरिए बताया कि कैसे छोटे-छोटे प्रयास से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। ग्रामीणों को बेहतर सुविधा मिले, इसके लिए बालसभा में ही सुझाव मांगे गए।
चार में से दो पुरस्कार चौहानन टोला को
पंचायतों को उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चार पुरस्कार दिए जाते हैं, इनमें से दो पुरस्कार सीधी की चौहानन टोला के खाते में जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी 24 अप्रेल को जम्मू कश्मीर में पंचायती राज दिवस पर आयोजित समारोह में चौहानन टोला को पंचायत की सेवाओं व सार्वजनिक वस्तुओं के वितरण में सुधार के लिए दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार व स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों में बाल-सुलभ प्रथा अपनाने के लिए बाल-हितैषी पुरस्कार से नवाजेंगे। इसके लिए सरपंच बीरेंद्र सिंह जम्मू कश्मीर पहुुच चुके हैं।

मजबूत किया बुनियादी ढांचा
चौहानन टोला में जनहितैषी व सामुदायिक कार्यक्रमों के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण पर भी जोर दिया गया है। सरपंच वीरेंद्र सिंह ने बताया कि ऐसे कई प्रयास किए जिससे न सिर्फ पंचायत बल्कि आमजन की भी आय बढ़ी है। सबकी योजना सबका विकास अभियान के तहत महिलाओं, विकलांगों व वृद्धजनों से सुझाव लेकर महिला स्व समूहों के जरिए मसाला उद्योग, होटल, बकरी पालन व किराना दुकान खोलने में सहयोग किया है। युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा। गांव में बिजली, पानी व पार्क जैसी सुविधाएं बढ़ाकर न सिर्फ रहन-सहन आसान किया, बल्कि इससे पंचायत को मिलने वाला टैक्स भी बढ़ा, जिसका उपयोग गांव के विकास में किया जा रहा है।