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अपने ही शहर में बिसरा दिया गए दुनिया के पहला गद्य लेखक.. नहीं मिल रही दो गज जमीन

सीधी के भंवरसेन में बाणभट्ट ने रची थी कालजयी रचना कादंबरी, आज से शुरू होगा दो दिवसीय उत्सव

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 Banbhatt connection with Sidhi

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सोनेलाल कुशवाहा @ सीधी. विश्व के पहले गद्य लेखक व महाकवि बाणभट्ट का सीधी जिले से गहरा नाता है। मान्यता है कि बाणभट्ट सोन नदी के किनारे भंवरसेन-चंदरेह में पैदा हुए हैं और कादम्बरी जैसी कालजयी कृति की रचना भी यहीं की है। इसी मान्यता के चलते सीधी-शहडोल व सतना जिले की सीमा पर स्थित बांध का नाम बाणसागर रखा गया था। इसके बाद लोगों ने सीधी का नाम उनके द्वारा रचित दुनिया के पहले उपन्यास कादंबरी करने की मांग छेड़ी थी। इसके लिए बकायदा प्रस्ताव पारित कर सरकार के पास भेजा गया था। हालांकि, सरकार ने इस पर मुहर नहीं लगाई।
अब महाकवि बाणभट्ट की प्रतिमा जिले के उसी भंवरसेन-चंदरेह में स्थापित करने की तैयारी है, जहां बैठकर वे दुनिया का पहला गद्य लेखन की शुरुआत की थी। हालाकि, दुर्भाग्यवश रचना पूरी होने से पहले ही उनकी मौत हो गई। और बाद में यह काम उनके पुत्र भूषणभट्ट ने पूरा किया था। प्रतिमा स्थापना की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। उज्जैन स्थित कालीदास अकादमी से इसकी प्रतिमा भी मंगवा ली गई है, लेकिन ऐनवक्त पर भारतीय पुरातत्व विभाग ने पेंंच फंसा दिया। जिसके बाद प्रतिमा को शहर के मानस भवन में रखवा दिया गया है।

बाणभट्ट समारोह आज से
मानस भवन में ही 17 मार्च को बाणभट्ट समारोह आयोजित किया गया है। दोपहर 3.30 बजे विधायक केदारनाथ शुक्ल व डॉ. राजेंद्र त्रिपाठी इसका शुभारंभ करेंगे। कालिदास संस्कृत अकादमी व उज्जैन इंद्रवती नाट्य समिति सीधी के तत्वावधान में आयोजित समारोह में शाम 5 बजे शोध संगोष्टी व 7 बजे रोशनी प्रसाद मिश्र द्वारा लिखित व निर्देशित नाटक चिरकुमारी का मंचन होगा। दूसरे दिन भंवरसेन में सुबह 11 बजे शोध संगोष्टी व शाम 3 बजे से स्थानीय लोक कलाओं का प्रदर्शन किया जाएगा। शाम 5 बजे समारोह का समापन होगा। इसमें डॉ. ओम प्रकाश भारती, मृत्युंजय प्रभाकर, रामदर्शन मिश्र, शेर बहादुर सिंह, रमा गोविंद पांडेय, डॉ. एपी पटेरिया, डॉ.दिलीप पांडेय, डॉ. बीएस कुशराम, डॉ. प्रदीप त्रिपाठी सहित अन्य जानेमाने साहित्यकार शामिल होंगे।

कौन हैं बाणभट्ट
बाणभट्ट सातवीं शताब्दी के संस्कृत गद्य लेखक और कवि थे। वह राजा हर्षवर्धन के आस्थान कवि थे। उनके दो प्रमुख ग्रंथ हैं। हर्षचरितम् तथा कादम्बरी। हर्षचरितम् में उन्होंने राजा हर्षवर्धन के जीवन.चरित्र का वर्णन किया है। कादंबरी दुनिया का पहला उपन्यास है। दोनों ग्रंथ संस्कृत साहित्य के महत्वपूर्ण ग्रंथ माने जाते हैं। कादम्बरी और हर्षचरितम् के अलावा बाणभट्ट की अन्य रचनाएं भी मानी जाती हैं। इनमें से मार्कण्डेय पुराण के देवी महात्म्य पर आधारित दुर्गा का स्त्रोत चंडीशतक है। प्राय: एक नाटक पार्वती परिणयष् भी बाण द्वारा रचित माना जाता है। परन्तु वस्तुत: इसका लेखक कोई पश्चाद्वर्ती वामन भट्टबाण है।

बचपन में चल बसे थे माता-पिता
बाण संस्कृत के गिने-चुने लेखकों में से एक हैं। इनके जन्मस्थान को लेकर दो राय हैं। कुछ लोग सोन नदी (प्राचीन हिरण्यबाहु) के तट पर स्थित प्रीतिकूट नाम के ग्राम में वात्स्यायनगोत्रीय विद्वान ब्राह्मण कुल 'बाणनेÓ में जन्म बताते हैं तो कुछ लोग सम्राट हर्षवद्र्धन के मगध में पैदा होना बताया है। हालांकि, प्रीतिकूट (सीधी) जन्म का जिक्र उनकी रचनाओं में भी मिलता है। इनमें उन्होंने अपने वंश का उद्भव सरस्वती तथा दधीचि के पुत्र सारस्वत के भाई वत्स से बतलाया है। वत्स का वंशज कुबेर था, जिसका चतुर्थ पुत्र पाशुपत बाण का प्रपितामह था। बाण के पितामह का नाम अर्थपति था, जिनको ग्यारह पुत्र हुए। बाण के पिता का नाम चित्रभानु था। बाण के शैशवकाल में ही उनकी मां राज्यदेवी की मृत्यु हो गई। उनका पालन-पोषण उनके पिता ने किया। बाण अभी १४ वर्ष के ही थे कि उनके पिता भी चल बसे।