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दंगल जैसी स्टोरी : पिता के साथ खेत में प्रेक्टिस करने वाली बेटी नेशनल लेवल पर दिखा रही कमाल

सीकर जिले के गांव गारिण्डा की चेतना धायल ने तश्तरी फेंक में नेशनल स्तर पर रजत पदक जीतकर राजस्थान की झोली में एकमात्र पदक डाल कर नाम रोशन किया है।

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Chetna Dhayal

फतेहपुर. फिल्म दंगल में पहलवान महावीर फोगाट अपनी दो बेटियों को खेत में तैयारी करवाते हैं। अपने स्तर पर ही उन्हें प्रतियोगिता में ले जाते हैं और फिर बेटियां कमाल दिखाने लगती हैं। पिता खेत में पे्रक्टिस करवाते हैं और बेटी मैदान से सोने-चांदी के मेडल लेकर आती हैं। इससे मिलती जुलती स्टोरी है राजस्थान के सीकर जिले के गांव गारिण्डा की चेतना धायल की।

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चेतना धायल ने तश्तरी फेंक में नेशनल स्तर पर रजत पदक जीतकर राजस्थान की झोली में एकमात्र पदक डाल कर नाम रोशन किया है। अब बेटी का खेलो इंडिया में भी चयन हुआ है। गारिण्डा गांव निवासी राम प्रताप धायल की बेटी चेतना रोज तीन घंटे अपने खेत में प्रैक्टिस करती है।

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पिता रोज चेतना को प्रैक्टिस करवाते हैं ताकि खेलों में नाम रोशन कर सके। राम प्रताप धायल ने बताया कि वह शुरू से ही बच्ची को खेल में भेजना चाहते थे। इसके लिए चार साल पहले एक बार एथलेटिक्स प्रतियोगिता में जिला स्तर पर चेतना को लेकर गए लेकिन चेतना का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा।

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इसके बाद पिता ने घर पर तश्तरी फेंकने का अभ्यास करवाया। चेतना भी जल्द ही तश्तरी फेंक में रूची दिखाने लग गई। इसके बाद पिता रोजाना चेतना को प्रैक्टिस करवाते रहे। अब तक चेतना चार बार राज्य स्तर पर विजेता रह चुकी है। स्कूली नेशनल में इस बार 38.88 मीटर तश्तरी फेंक कर रजत पदक जीता है। इसके अलावा चेतना ओपन नेशनल में भी रजत पदक जीत चुकी है। पिछले वर्ष चेतना को वेस्ट जोन की बेस्ट ऐथलीट का अवार्ड भी दिया जा चुका है।

राजस्थान को सिर्फ चेतना ने दिलाया पदक

हरियाणा के रोहतक में राजीव गांधी स्टेडियम में आयोजित 63 वीं राष्ट्रीय विद्यालयी एथेलेटिक्स चैम्पियनशिप में राजस्थान को एकमात्र पदक मिला है। चेतना धायल ने तश्तरी फेंक में रजत पदक जीता है। इसके अलावा राजस्थान की झोली में कोई पदक नहीं आया। चेतना पिछले चार वर्षों से तश्तरी फेंक रही है। चेतना धायल अब तक पांच बार नेशनल खेल चूकी है।

मम्मी सरपंच है पिता चलाते है स्कूल

चेतना धायल के पिता गांव में ही निजी स्कूल चलाते है। स्कूली स्तर पर टीम ले जाने के लिए उन्होंने चेतना को तैयार किया था। चेतना की माता पार्वती देवी गारिण्डा ग्राम पंचायत की सरपंच है। चेतना गुरूकुल इंटरनेशनल स्कूल में 12 वीं कक्षा में अध्ययनरत है।

गांव में नहीं है कोई खिलाड़ी
चेतना के गांव गारिण्डा में तश्तरी का कोई पुराना खिलाड़ी भी नहीं है। चेतना अपने ही खेत पर प्रैक्टिस करती है। हालांकि खुद के पिता की स्कूल से हर एथेलेटिक्स की टीम जाती है, ऐसे में अब कई खिलाड़ी तैयार हो गई। लेकिन तश्तरी फेंक में शेखावाटी से कम ही खिलाड़ी खेलते है।