
सीकर.
जिले में रविवार की दोपहर किसानों के अरमानों की सांसे तोड़ती नजर आई। अचानक हुए मौसम परिवर्तन से फसल पर ओलों की मार ने किसानों की मेहनत को चौपट कर दिया। खेतों में बिछी ओलों की चादर बयां कर रही थी किसानों के दर्द को। ओलावृष्टि से पूरे राजस्थान में करोड़ों की फसलें बर्बाद हुई हैं।
इधर सीकर के किसानों में ओलावृष्टि के बाद एक गाना वायरल हुआ है, जो मौसम की मार झेल रहे किसानों की पीड़ा बयां कर रहा है। यह गाना सोशल मीडिया में वाट्सअप और फेसबुक पर जमकर शेयर किया जा रहा है।
ओलों की मार से फसल बर्बाद होने पर पत्रिका टीम ने कई गांवों को दौरा किया तो किसान बस इतना ही कह पाए कि पहले राज रूठा अब राम भी हमसे रूठ गया है। फसल पकने से पहले हुई प्राकृतिक आपदा ने किसानों के सपनों को चकनाचूर कर दिया है। माकपा, बसपा,भाजपा, कांग्रेस के नेताओं ने भी खेतों में पहुंचकर फसलों की बर्बादी का जायजा लिया।
शेखावाटी में सर्वाधिक नुकसान
-सीकर के पांच तहसीलों के 40 गांवों में ज्यादा खराब श्रीमाधोपुर व पलसाना में खेतों में बिछी ओलों की चादर।
-90 से अधिक गांवों के किसान प्रभावित, बेर के आकार के गिले ओले कलक्टर ने दिए सर्वे के आदेश
-गेहूं, जौ, सरसो, मैथी व प्याज की फसलों पर अधिक मार
-शेखावाटी में प्रमुख रूप से गेहूं, जौ, सरसो, मैथी व प्याज की फसलों पर ओलों का सबसे अधिक प्रभाव हुआ है।
-गेहूं व सरसों की फसल होली के बाद पकने पर कटने की तैयारी में होती है।
-इसके अलावा अप्रेल माह में आने वाला शेखावाटी का प्याज भी ओलों की मार सह नहीं पाया है।
-सबसे ज्यादा नुकसान प्याज के बीज को हुआ है। ओलों की मार के कारण प्याज के बीज कई जगह नष्ट हो गया है।
-श्रीमाधोपुर इलाके के किसानों का कहना है कि इस बार ओलों ने कई सालों का रिर्काड तोड़ दिया।
सीकर जिले की ये तहसीलें प्रभावित
ओलों की मार से जिले की सीकर, खंडेला, श्रीमाधोपुर, धोद व दांतारामगढ़ तहसील के करीब 90 से अधिक गांव प्रभावित हुए है। पलसाना, रानोली, धोद,श्रीमाधोपुर, नांगल नाथुसर, खंडेला, मुण्डवाड़ा, सहित कई गांवों में फसलों को भारी नुकसान हुआ है। ओलों के कारण इन गांवों में खेतों में सफेद चाछर सी बिछ गई। कई जगह बेर के आकार के ओलों पडऩे से जमीन में भी छेद बन गए। खेतों में बाड़ के सहारे ओलों का ढेर लग गया। करीब आधे घंटे तक हुई ओलावृष्टि के चलते कई जगह लोग घरों के बाहर भी नहीं निकल पाए।
सीकर जिले में 30 से 70 फीसदी खराबा!
सीकर जिले के कई गांवोंं में ओलों की मार से करीब 30 से 70 प्रतिशत फसल खराब होने का अनुमान बताया गया है। हालांकि अनुमान का पूरा आंकलन गिरदावर रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। किसानों ने बताया कि चार वर्ष पहले भी इसी तरह ओलावृष्टि से किसानों की फसलें चौपट हो गई थी। इस दौरान करीब 80 प्रतिशत से अधिक नुकसान फसलों को हुआ था। इस बार भी आंकलन पिछली बार से अधिक है।
ओलावृष्टि से हुए नुकसान के आंकलन को प्रशासन अलर्ट
जिले की पांच तहसीलों में ओलों की चपेट में आने से खराब हुई फसल की गिरदारवरी के लिए जिला कलक्टर ने आदेश जारी किए दिए गए है। खराबे के आकलन की रिपोर्ट दो दिन में पेश करने के लिए कहा गया है। प्रभावित क्षेत्रों के तहसीलदारों को भी गांवों में दौरा कर किसानों से सम्पर्क करने के निर्देश दिए है। रविवार शाम को कई गांवों में प्रशासनिक अधिकारियों की टीम पहुंची।
हवाओं के साथ ओले
सीकर जिले में रविवार को दोपहर में मौसम में अचानक बदलाव आया, आसमान में काले बादलों के साथ तेज अंधड़ के बाद बारिश शुरू हो गई। तेज हवा से कई स्थानो पर जौ की फसलें खेतों में पसर गई। लसाडिया के पकोडी ढाणी ,अणतपुरा की दौलती में बेर के आकार के ओले गिरे लगने। हमीरपुरा सुजाना होल्याकाबास कोटडी में ओलों से नुकसान हुआ। इसी तरह धोद इलाके में बारिश के साथ लगभग 10 -15 मिनट तक लगातार ओले गिरे। ओलो का आकर भी चने के आकर से बड़ा था । जिससे इस समय इसबगोल व जौ की फसलों को नुकसान हुआ है। तेज बारिश व ओलो से इसबगोल की फसल नीचे पसर गई। इसी तरह अजीतगढ़, झाड़ली व नारे गांव में भी ओलों से नुकसान हुआ है।
सीकर प्रशासन ने करवाया सर्वे
प्रशासन ने देर शाम तक प्रांरभिक सर्वे कराया। अपर जिला कलक्टर जयप्रकाश ने बताया कि कई क्षेत्रों में 30 से 70 फीसदी तक खराबा होने की सूचना है। ज्यादा प्रभावित गांवों में जयरामपुरा ,डस्सी, रलावता, पुजारी का बास, तिवाड़ी की ढाणी, फतेहपुरा, सेवा की ढाणी, निमेडा, नवरंगपुरा, भोजपुर,
कडिय़ानपुरा, जसवंतपुरा, कंचनपुर, जोरावर, नालोद, कोटड़ी, थोई, कुशलपुरा, रानोली, पलसाना व शिश्यू सहित अन्य स्थानों पर नुकसान हुआ है।
Published on:
05 Mar 2018 02:56 pm
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