
खाटूश्यामजी मंदिर में लाखों का 'दान पात्र घोटाला' , जांच शुरू
सीकर/खाटूश्यामजी. खाटूश्यामजी मंदिर ट्रस्ट के मनमर्जी से दो गल्ले रखवाने के मामले में देवस्थान विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में है। विभाग ने कहने को तो यहां निरीक्षक से लेकर सहायक निदेशक की जिम्मेदारी तय कर रखी है। लेकिन इन जिम्मेदारों की ढ़ील-पोल का फायदा उठाकर मंदिर ट्रस्ट ने कोरोनाकाल में दो गल्ले अपने हिसाब से रखवा दिए। जब गल्ले भर गए तो खुद चुपचाप उठवा भी लिए। जब शिकायत हुई तो विभाग के जिम्मेदार जागे। विभाग ने अब दोनों गल्लों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। इधर, श्याम मंदिर में रखे गए दान पात्र के उठे विवाद में श्री श्याम मंदिर कमेटी ने पूर्व अध्यक्ष पर षडय़ंत्र का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सिर्फ कमेटी को बदनाम करने की कोशिश है।
विभाग सिर्फ ताले लगाने और दान राशि गिनवाने तक सीमित
देवस्थान विभाग का सीकर में कोई कार्यालय नहीं होने की वजह से विभाग महज खानाूपर्ति में उलझा हुआ है। मंदिर ट्रस्ट की हर गतिविधि की जानकारी रखने का दावा करने वाले विभाग की हकीकत यह है कि वह सिर्फ मंदिर ट्रस्ट के सूचना देने पर दान पात्र रखवाने और दान राशि की गिनती में ही आता है।
और मंदिर कमेटी की यह सफाई
इधर, कमेटी अध्यक्ष शंभू सिंह चौहान का कहना है कि कोविड संक्रमण काल में मंदिर बंद होने के दरिम्यान निकासी द्वार पर दानपात्र नहीं होने से श्रद्धालु चढावे के रूपयों को बाहर ही रखकर चले जाते थे। चढावे के रूपयों को देखकर चोर उचक्के सक्रिय हो गए थे। जिसके चलते कमेटी ने अगस्त-सितंबर माह के दरिम्यान 14-15 नंबर के भेंटपात्र पर कमेटी की सील लगाकर वहां रख दिए थे। उक्त कैमरे सीसीटीवी और सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में थे। मंदिर खुलने के बाद दानपात्रों को सेवक परिवार व सुरक्षा के दायरे में वापिस कमरे में रखवा दिया था। अध्यक्ष ने बताया कि कमरे में रखे दानपात्रों का वीडियो पूर्व अध्यक्ष मोहन सिंह (दास) चौहान के पुत्र श्याम सिंह ने बनाया था। जबकि दानपात्र रखने के दौरान वह स्वयं मौके पर मौजूद था। गल्ले रखने की सूचना भी पूर्व अध्यक्ष को दी गई थी। सुरक्षा को लेकर संपूर्ण मंदिर परिसर में 80 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए है। कमेटी ने कोई भी चीज छुपाकर नहीं रखी है। इसकी कोई भी आकर जांच कर सकता है। पूर्व अध्यक्ष को पद से हटाए जाने के कारण वे कमेटी पर निराधार आरोप लगाकर ट्रस्ट की साख धुमिल करने की कोशिश कर रहे है। गौरतलब है कि रविवार को सेवक परिवार के कुछ सदस्यों ने कमेटी पर आरोप लगाया कि मंदिर के निकास द्वार पर रखे गए 14-15 नंबर के दानपात्रों को उठवाकर एक कमरे में रखवा दिया जिनपर देवस्थान की सील ना होकर कमेटी की सील लगी हुई है। शिकायत पर पहुंचे सहायक आयुक्त व निरीक्षक ने टीम के साथ मौके पर पहुंचकर कमेटी के ताले तुड़वाकर देवस्थान की सील लगाई।
इनका कहना है
भेंटपात्र रखवाने के दौरान सेवक परिवार के सदस्य मौके पर मौजूद थे और यह सब सीसीटीवी व सुरक्षाकमॢमयों की देखरेख में हुआ। प्रन्यास पदाधिकारियों की ऐसी कोई गलत मनसा नहीं थी। यह सिर्फ कमेटी को बदनाम करने की मनसा से सुनियोजित षडय़ंत्र है।
कालू सिंह चौहान (कोषाध्यक्ष, श्री श्याम मंदिर कमेटी, खाटूश्यामजी)
हमें सूचना दिए बिना ही कमेटी ने दानपात्र कमरे में रखवा दिए। नियमानुसार दानपात्रों पर देवस्थान की सील होनी चाहिए। जबकि कमेटी ने अपनी सील लगा दी, जो गलत है। दानपात्र देवस्थान की देखरेख में ही खोले जाते है।
मोहनदास चौहान (पूर्व अध्यक्ष, श्री श्याम मंदिर कमेटी, खाटूश्यामजी)
मामले की देवस्थान विभाग जांच कर रहा है। सीसीटीवी भी खंगाले जा रहे हैं।
सुरेन्द्र पूनियां (इंस्पेक्टर, देवस्थान विभाग)
Published on:
18 Feb 2021 10:03 am
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