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इस किसान ने लगाया थोड़ा सा दिमाग और आज खेती से कमा रहा लाखों, जानिए कैसे

Farmer Earn in Lakhs From Farming : जोर की ढाणी के किसान कान सिंह निर्वाण ने अश्वगंधा, शतावरी, सफेद मूसली जैसी औषधीय खेती कर किसानों के लिए एक मिसाल कायम की है।

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Farmer Earn in Lakhs From Farming : जोर की ढाणी के किसान कान सिंह निर्वाण ने अश्वगंधा, शतावरी, सफेद मूसली जैसी औषधीय खेती कर किसानों के लिए एक मिसाल कायम की है।

इस किसान ने लगाया थोड़ा सा दिमाग और आज खेती से कमा रहा लाखों, जानिए कैसे

सीकर.

farmer Earn in Lakhs From Farming : किसानों की आय बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार की ओर से शुरू की गई औषधीय खेती भले ही कागजों में दफन हो गई हो लेकिन जिला मुख्यालय के पास जोर की ढाणी के किसान कान सिंह निर्वाण ने अश्वगंधा, शतावरी, सफेद मूसली जैसी औषधीय खेती कर किसानों के लिए एक मिसाल कायम की है। खास बात है कि ये खेती प्रकृति पर आधारित है। अब भूजल स्तर गिरता जा रहा है और खेती की लागत दिनोदिन बढ़ रही है। ऐसे में किसान का दावा है कि औषधीय खेती के जरिए ही किसान मौजूदा परिस्थिति में खेती को जीवित रख सकता है। किसान की खेती के तरीके जानने के लिए दूसरे जिलों सहित आस-पास के दर्जनो किसान आते हैं और खेती के गुर सीखने के साथ स्वावलम्बी बन सकते हैं। गौरतलब है कि जिले के प्रगतिशील किसान कान सिंह राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सम्मानित हो चुके हैं।

डेढ बीघा में लाखों की कमाई ( Earn Lakh from Farming in Sikar )
किसान ने खेत की महज डेढ बीघा जमीन में 22 तरह के औषधीय पौधे लगा रखे हैं जिनसे किसान हर साल औसतन डेढ से दो लाख रुपए कमाता है। किसान का कहना है कि मौजूदा दौर सबसे बड़ी समस्या गिरता भूजल स्तर और रोगकीट का प्रकोप है। जिससे भूमि की नमी कम हो रही साथ ही पौधे जल्द खत्म हो जाते हैं। ऐसे में पौधे लगाने के लिए आच्छादन के जरिए ही भूमि की नमी को कायम रखा जा सकता है। साथ जलसंरक्षण किया जा सकता है। इसके लिए वे घास-फूस से पौधों की जड़ को ढक देता है और फसल कीट पतंगों से बच जाती है।

यूं समझे उत्पादन का गणित
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार उचित तापमान, आद्रता तथा प्रचुर मात्रा में जैविक कार्बन की उपस्थिति, जैविक खेती में सूक्ष्म जीवों की संख्या में इतनी वृद्धि होती है कि 1 एकड़ क्षेत्र में 800 से 1000 किलोग्राम तक सूक्ष्म जीव उत्पन्न हो जाते है। ये सूक्ष्म जीव सतत रूप से पैदा होते रहते हैं और मरते भी रहते हैं। एक जीवाणु की जब मृत्यु होती है तो इसमें 14 प्रतिशत नाइट्रोजन 40 प्रतिशत कार्बन तथा 3 प्रतिशत फस्फोसट प्राप्त होता है, इस तरह से यदि 1000 किलोग्राम सूक्ष्म जीव जब मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं तो इस इससे 400 किलोग्राम, कार्बन, 140 किलोग्राम नाइट्रोजन तथा 30 किलोग्राम फास्फोरस मिट्टी में मिल जाती है।


जिससे बेहतर और गुणवत्ता परक उत्पादन मिलता है। परम्परागत खेती भी हो सकती है। बकौल कान सिंह मिट्टी की सतह पर सूक्ष्म जीवों के प्रजनन एवं क्रियाशीलता को बढ़ाने के लिए पेड़ पौधों की सुखी टहनियाँ, पत्तियाँ तथा पूर्व फसल के अवशेषों का उपयोग कर मिट्टी के सतह को आच्छादित किया जाता है। इसके अलावा मुख्य फसल के साथ, कई प्रकार की सहायक (आच्छादन) फसलें उगाकर मिट्टी की सतह को आच्छादित रखा जाता है। ऐसे में किसान अपने खेत में दूसरी परम्परागत फसलों का उत्पादन भी ले सकता है।