
सीकर.
जिले में इस बार रबी की प्रमुख फसल चने का बम्पर उत्पादन होगा। इससे किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। जिले में चने की बुवाई 55 हजार हेक्टेयर में हुई। सरकार के समर्थन मूल्य 4400 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से चना का उत्पादन 6 लाख 60 हजार मीट्रिक टन होने की उम्मीद है। समर्थन मूल्य के आधार पर चने की कीमत करीब तीन अरब रुपए से अधिक आंकी जा रही है।
रिकार्ड बुवाई रिकार्ड उत्पादन
रबी सीजन की नकदी फसल सरसों के साथ ही इस बार किसानों ने चना की रिकार्ड बुवाई की। कृषि विभाग के लक्ष्य से ज्यादा क्षेत्र में चने की बुवाई की गई थी। जिले की आबोहवा के अनुसार चने की उत्पादकता दर 12 क्विंटल किलोग्राम प्रति हैक्टेयर तक पहुंच गई। जबकि पिछले कई वर्षों के दौरान चना की उत्पादकता वर्ष 2010-11 में 1200 हैक्टेयर से अधिक हुई थी।
गुणवत्ता बेहतर
चना की बुवाई इस बार बारानी क्षेत्र में अधिक हुई थी। प्रतिकूल मौसम के कारण भले ही चना का फाल झड गया हो लेकिन इस बार चना का दाना अधिक पकाव लिए है। थोक व्यापारी के अनुसार इस बार चना का दाना भी पिछले वर्षों की तुलना में अधिक चमकदार है। हालांकि चना की शुरूआती आवक को देखते हुए भाव कम है।
इनका कहना है...
चना की बुवाई के अनुसार उत्पादकता दर बढ़ी है। इससे जिले के लाखों किसानों को सीधे तौर पर फायदा होगा।
- हरदेव सिंह बाजिया, कृषि अधिकारी, सीकर
दवा के छिडकाव से मिर्च के पौधे हुए खराब
सीकर.
उपज बढ़ाने के लिए खरीदी गई दवा के छिडक़ाव के कारण एक किसान की हरी मिर्च की उपज खराब हो गई है। जगमालपुरा निवासी श्रीनिवास भामू ने आरोप लगाया कि उसने जयपुर रोड स्थित एक बीज भंडार से दवा खरीदी।
मिर्च के पौधों की बढ़वार के लिए दवा डालने के बाद मिर्च के पौधे बीच में खराब होने शुरू हो गए। इस कारण करीब एक बीघा में लगे पौधों के तने बीच में टूटने शुरू हो गए। किसानों को काफी आर्थिक नुकसान हुआ। इससे आहत होकर किसान ने तकाजा किया तो बीज भंडार के मालिक ने इसे दवा का दुष्प्रभाव नहीं बताया।
Published on:
21 Apr 2018 09:22 am
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