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ग्राउंड रिपोर्ट: राजस्थान में मशरूम उत्पादन 8 साल में 15 गुना बढ़ा, युवाओं को भा रही खेती

राजस्थान में मशरूम की खेती तेजी से बढ़ी है। 2017-18 से 2023-24 के बीच उत्पादन 15.9 गुना बढ़कर 20.69 हजार टन हुआ, जिससे प्रदेश देश में 9वें स्थान पर पहुंच गया। कम जगह, बेहतर मुनाफा और मांग मुख्य वजह हैं, हालांकि कृषि दर्जा न मिलना चुनौती है।
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सीकर

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Arvind Rao

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रुद्रेश शर्मा

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Oct 17, 2026

ground report rajasthan mushroom production

सीकर के नानी गांव स्थित अपनी यूनिट में मशरूम उत्पादक किसान मोटाराम शर्मा और उगाई गई मशरूम (पत्रिका फोटो)

-रुद्रेश शर्मा

Rajasthan Mushroom Cultivation: सीकर: राजस्थान ने मशरूम (खुम्ब) की खेती में बड़ी छलांग लगाई है। कम जगह में बेहतर मुनाफे और दवा कंपनियों व रेस्तरां में बढ़ती मांग ने प्रदेश में मशरूम की खेती का रुझान बढ़ाया है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 से 2023-24 के बीच प्रदेश में मशरूम उत्पादन 15.9 गुना बढ़ा। इसके साथ ही राजस्थान देश के शीर्ष दस मशरूम उत्पादक राज्यों में शामिल हो गया।

पिछले करीब एक दशक से देश में भी मशरूम की खेती के प्रति किसानों, खासकर नवाचारधर्मी युवाओं का रुझान बढ़ा है। कम जमीन में खेती, छोटा उत्पादन चक्र और पारंपरिक खेती की तुलना में बेहतर मुनाफा इसकी प्रमुख वजहें हैं। कृषि मंत्रालय के अनुसार, पिछले पांच साल में देश में मशरूम का उत्पादन लगभग 89 प्रतिशत बढ़ा है। वर्ष 2019-20 में देश में 2.11 लाख टन मशरूम का उत्पादन हुआ था, जो 2024-25 में बढ़कर 3.99 लाख टन हो गया। वर्ष 2025-26 में इसके 4.27 लाख टन रहने का अनुमान है। बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में हाल के वर्षों में उत्पादन तेजी से बढ़ा है।

कमरों में उत्पादन

मशरूम की खेती की खासियत कम जगह में कई उत्पादन चक्र लेना है। इसलिए मशरूम को छोटे और सीमांत किसानों, भूमिहीन युवाओं व महिलाओं के लिए वैकल्पिक उद्यम माना जा रहा है। मौसम की मार से फसल खराब होने की आशंका भी इसमें अपेक्षाकृत कम होती है। मशरूम की सामान्य किस्मों की उत्पादन लागत करीब 70 से 120 रुपए प्रति किलोग्राम है, जबकि थोक में करीब 200 रुपए और खुदरा बाजार में 300 रुपए प्रति किलोग्राम तक कीमत मिल जाती है।

राजस्थान में प्रमुख चुनौतियां

  • कृषि का दर्जा नहीं, इसलिए उत्पादन लागत अधिक
  • सरकारी सब्सिडी का अभाव
  • स्थानीय बाजार सीमित
  • प्रशिक्षण केंद्र बढ़ाने की जरूरत

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युवाओं में मशरूम का बढ़ रहा रुझान

दवा उद्योग में विशेष मांग

कम स्थान में खेती, बाजार में अच्छी मांग और मुनाफे के कारण युवाओं में मशरूम की खेती का रुझान बढ़ रहा है। इसकी मेडिसिनल वैल्यू भी अधिक है और दवा उद्योग की मांग के अनुरूप किस्मों का उत्पादन हो रहा है। हालांकि, इसे कृषि श्रेणी का दर्जा नहीं मिलने से बिजली कनेक्शन समेत अन्य सुविधाओं में छूट नहीं मिलती। प्रदेश में मशरूम का बीज भी पर्याप्त मात्रा में तैयार नहीं हो रहा है।

— डॉ. मोटाराम शर्मा, सदस्य, मशरूम अनुसंधान निदेशालय

मशरूम में अल्जाइमर और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव के गुण माने जाते हैं। इसमें विटामिन और कैल्शियम भी होते हैं। इसीलिए दवा उद्योग में इसकी मांग है। राजस्थान में सरकार इसे कृषि के बजाय उद्योग मानती है। दक्षिण भारत में सब्सिडी दी जाती है, जो राजस्थान में भी दी जानी चाहिए। वनवासी क्षेत्रों में मशरूम की खेती से आदिवासियों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग (टीएडी) को एक प्रोजेक्ट भी भेजा है।

— प्रो. एनएल मीणा, प्रोजेक्ट इंचार्ज, ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन मशरूम

मेन्यू में बढ़ी मांग

प्रदेश में मुख्य रूप से बटन, ऑयस्टर, मिल्की और पैडी स्ट्रॉ किस्मों के मशरूम का उत्पादन हो रहा है। इनमें मिल्की मशरूम राजस्थान की गर्म जलवायु के अनुकूल है और इसे लगभग 28 से 35 डिग्री तापमान में उगाया जा सकता है। वहीं, बटन मशरूम के लिए करीब 16 से 18 डिग्री तापमान जरूरी है। किसान नियंत्रित तापमान वाले कमरों में इसका उत्पादन कर रहे हैं। जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जैसे पर्यटन शहरों में रेस्तरां की बढ़ती मांग भी बाजार का विस्तार कर रही है। हालांकि, तापमान नियंत्रण, तकनीकी ज्ञान और मार्केटिंग अब भी बड़ी चुनौतियां हैं।

ऐसे बदली तस्वीर

मशरूम उत्पादन में सबसे दिलचस्प बदलाव राजस्थान में देखने को मिला है। वर्ष 2017-18 में 1.30 हजार टन उत्पादन के साथ प्रदेश देश में 13वें स्थान पर था। वहीं, वर्ष 2023-24 में उत्पादन बढ़कर 20.69 हजार टन (15.9 गुना) हो गया और प्रदेश नौवें स्थान पर पहुंच गया। प्रदेश के प्रमुख उत्पादक जिलों में सीकर, झुंझुनूं, चूरू, जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, नागौर, पाली, जालोर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर शामिल हैं। मशरूम की खेती करने वालों में नवाचारधर्मी युवा किसानों की संख्या अधिक है।

राज्य उत्पादन (हजार टन)

क्रमांकराज्यउत्पादन (हजार टन)
1बिहार39.25
2ओडिशा35.40
3महाराष्ट्र32.28
4उत्तर प्रदेश27.70
5उत्तराखंड27.39
6छत्तीसगढ़23.27
7हरियाणा22.65
8हिमाचल प्रदेश20.88
9राजस्थान20.69
10पंजाब19.82

स्रोत: मास्क अनुसंधान निदेशालय, सोलन (हिमाचल प्रदेश)