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हनुमान जयंती 2018 : विश्व प्रसिद्ध है बालाजी का ये मंदिर, कोई नहीं लौटता यहां से खाली हाथ

सिद्धपीठ सालासर धाम में चैत्र पूर्णिमा (हनुमान जयंती 2018) के उपलक्ष्य में लक्खी मेला भरेगा।

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सालासर. फिजां में गूंजते बाबा के जयकारे, लहराते लाल ध्वज, दर्शन के लिए कतार में लगकर हनुमान चालीसा का पाठ करते श्रद्धालु। सिद्धपीठ सालासर धाम में आगामी चैत्र पूर्णिमा (हनुमान जयंती) के उपलक्ष्य में लगने वाले बाबा के लक्खी मेले के पहले दिन बुधवार को कुछ ऐसा ही माहौल रहा।

हनुमान जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में शुरू हुए मेले में पहले दिन उमड़े श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर धोक लगाई और मन्नौतियां मांगी। अखंड धूणे के दर्शन किए। मंदिर में लगे पेड़ पर मन्नौती के नारियल बांधे। सुबह शुरू हुआ पदयात्रियों के आने का सिलसिला शाम तक जारी रहा।

हनुमान सेवा समिति अध्यक्ष यशोदानन्दन पुजारी व उपाध्यक्ष मनोज पुजारी ने बताया कि मेले को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं को सुविधा पूर्वक दर्शन करवाने के लिए मेला ग्राउंड में रैलिंग लगाई गई है।सुरक्षा व्यवस्था के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मी तैनात हैं। मेले की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

अंजनि माता के लगाई धोक
बालाजी के दर्शन करने से पहले श्रद्धालुओं ने अंजनी माता मंदिर में भी धोक लगाई। चूनरी ओढ़ाकर व प्रसाद चढ़ाकार अंजनी माता का आशीर्वाद लिया।


उठा रहे खरीदारी का लुत्फ
राज्य सहित देश के अनेक प्रांतों से उमड़े श्रद्धालु बाबा के दर्शन के बाद मेले में खरीदारी का भी लुफ्त उठा रहे हैं। श्रद्धालुओं की संख्या बढऩे से प्रसाद, खिलौनों सहित अन्य दुकानों पर खरीदारी बढऩे से दुकानदारों के चेहरे भी खिल उठे हैं।


भक्ति से प्रसन्न होकर विराजे थे बालाजी
मंदिर की आस्था के बारे में नागरमल पुजारी ने बताया कि बाबा मोहनदास की भक्ति से प्रसन्न होकर बालाजी महाराज सालासर में विराजमान हुए थे। मंदिर में आने वालों की हर मन्नत पूरी होती है। यहां से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटता।

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