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VIDEO : हे भगवान ! ऐसा तो किसी ससुर-बहू के साथ ना हो

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जोगेन्द्र सिंह गौड़
सीकर. बहू के मर्ज और बैंक के कर्ज के बीच एक किसान का दर्द आत्महत्या के मुहाने तक पहुंच गया है। दुखभरी की यह दास्तां राजस्थान के सीकर जिले के गांव भैरूपुरा निवासी किसान मानाराम की है। जिसको एक तरफ तो बहू की बीमारी का गम सता रहा है। वहीं दूसरी ओर बैंक कर्ज उसके दर्द को दोगुना बढ़ा रहा है। हालात से परेशान और मजबूर किसान ने आखिरकार पीएम से मदद की गुहार लगाई है। ताकि उसकी पीड़ा का निवारण हो सके और वह बाकी बचे परिवार को संभाल सके।

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लक्ष्मणगढ़ तहसील के भैरूपुरा गांव के बुजुर्ग किसान मानाराम भास्कर ने कुछ सालों पहले बैंक से चार लाख रुपए का ऋण लिया था। मानाराम के अनुसार ऋण लेकर वह अपनी पुस्तैन जमीन पर फसल खड़ी करना चाह रहा था। कुछ पैसा पशुधन खरीदने के लिए उधार लिया था। लेकिन, इसी दौरान उसकी बड़ी बहू सरिता बीमार पड़ गई। कमर के नीचे पैरों तक का हिस्सा सुन्न हो गया तो उसने खाट पकड़ ली।

जिसके इलाज के लिए मानाराम ने ऋण की सारी पूंजी उसी पर खर्च कर दी। लेकिन, अभी भी सरिता की हालत नाजुक बनी हुई है। इधर, बीमारी पर सारा पैसा खर्च होने के बाद हालात यह बन गए हैं कि ऋण नहीं चुकाने पर संबंधित बैंक ने उसकी जमीन कुर्क करने के आदेश जारी कर दिए हैं। ऋण चुकता करने के लिए बैंक कर्मचारी हर दिन उसके घर आ धमकते हैं। रुपया लौटाने के लिए ताने और जमीन नीलाम करने की धमकी देते हैं। जिनसे परेशान होकर वह अब आत्महत्या करने की बात करता है।


खप गया पशुधन


ऋण चुकाने और हालात सुधारने के लिए किसान मानाराम ने खेती के लिए ऊंट खरीदे थे। लेकिन, इनमें भी बीमार होने के कारण एक-एक कर पांच ऊंट अकाल मौत का शिकार हो गए। ग्रामीण जगदीश प्रसाद सुंडा के अनुसार मुख्यमंत्री सहायता कोष से आर्थिक मदद दिलवाने के लिए ग्रामीणों ने मिलकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। प्रशासन को भी आगे आकर मजबूर किसान का सहयोग करना चाहिए। ताकि मजबूरी में नीलाम होने वाली जमीन को कुर्क होने से बचाया जा सके।


बेटा भी बीमार


मानाराम का बेटा पुरुषोतम भी आंखों की बीमारी से परेशान है। जिसके कारण उसे कोई मजदूरी पर रखने को तैयार नहीं है। गांव वालों का कहना है कि पीडि़त परिवार को बीपीएल में शामिल कर सरकारी सुविधाओं का लाभ दिया जाना चाहिए।