
सीकर. देश में तक्षशिला व नालंदा जैसी उच्च शिक्षा प्रणाली फिर लौटेगी। इन प्राचीन विश्वविद्यालयों को आदर्श मानते हुए यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) देश के उच्च शिक्षण संस्थानों को मल्टीडिसिप्लनरी (बहुविषयक) संस्थानों में बदलेगा। जहां विभिन्न विषयों की पढ़ाई एक साथ होगी। इस संबंध में यूजीसी ने विश्वविद्यालयों सहित उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए जारी भूमि मापदंड की रिपोर्ट में अपना विजन पेश किया है।
उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक हर जिले में कम से कम एक उच्च शिक्षण संस्थान होगा। इनमें स्थानीय या दो भाषाओं में मल्टीडिसिप्लीनरी शिक्षण होगा। नई शिक्षा नीति के तहत 2035 तक 2018 के मुकाबले 50 फीसदी नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य भी तय किया गया है।
रिपोर्ट में बताया है कि तक्षशिला, नालंदा, वल्लभी और विक्रमशिला में भारत और दुनिया के हजारों छात्र बहु-विषयक वातावरण में अध्ययन कर रहे थे। ये शिक्षा आज अन्य देशों को शैक्षिक और आर्थिक रूप से बदल रही है। भारत को भी नवाचारी और सर्वांगीण व्यक्तियों के निर्माण के लिए इस परंपरा को लौटाने की जरुरत है। इसलिए 2040 तक देश की संस्थाओं को मल्टीडिसिप्लीनरी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
विश्वविद्यालय व अन्य उच्च शिक्षण संस्थाओं के संचालन के लिए रिपोर्ट में भूमि का मापदंड भी बताया गया है। इसके मुताबिक विश्वविद्यालय के लिए देशभर में अब 20 एकड़ जमीन पर्याप्त होगी। महानगरों में 10 एकड़ जमीन जरूरी होगी। तीन हजार नामांकन के साथ विश्वविद्यालय का 40 प्रतिशत क्षेत्र खुला होगा। गौरतलब है कि प्रदेश में विश्वविद्यालय के लिए अब तक 30 एकड़ जमीन की अनिवार्यता थी।
Published on:
03 Feb 2025 08:50 pm
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