
सीकर. मकर सक्रांति का पर्व भारत से बाहर रहने वाले भी बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। मकर संक्रांति का विभिन्न देशों में अलग-अलग नाम हैं। मकर संक्रांति का पर्व विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग रीति-रिवाजों से मनाया जाता है। आइए जानते हैं किस देश में कैसे मनाई जाती है मकर संक्रांति।
नेपाल
नेपाल में मकर संक्रांति को माघे-संक्रांति, सूर्योत्तरायण और थारू समुदाय में माघी कहा जाता है। इस दिन नेपाल में सार्वजनिक अवकाश होता है। यह पर्व थारू समुदाय का प्रमुख त्यौहार है। नेपाल के अन्य समुदाय के लोग भी तीर्तस्थल में स्नान करके दान-पुण्य करते हैं। इसके साथ ही तिल, घी, शर्करा और कन्दमूल खाकर यह पर्व मनाते हैं। तीर्थस्थलों में रूरूधाम (देवघाट) व त्रिवेणी मेला सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है।
थाईलैंड
थाईलैंड में व इस पर्व को सॉन्कर्ण के नाम से जानते हैं। यहां की संस्कृति भारतीय से भिन्न है। कहा जाता है कि थाईलैंड में प्रत्येक राजा की अपनी विशेष पतंग होती थी जिसे जाड़े के मौसम में भिक्षु और पुरोहित देश में शांति और खुशहाली की आशा में उड़ाते थे। वर्षा ऋतु में वहां के लोग अपनी प्रार्थनाओं को भगवान तक पहुंचाने के लिए पतंग उड़ाते थे।
म्यांमार
म्यांमार में भी मकर संक्रांति मनाई जाती है। यहां पर यह पर्व थिनज्ञान के नाम से मनाया जाता है। म्यांमार में यह पर्व 3-4 दिन तक चलता है। माना जाता है कि यहां पर यह पर्व नए साल के आने की खुशी में मनाया जाता है।
श्रीलंका
श्रीलंका में मकर संक्रांति मनाते का तरीका भारतीय संस्कृति से थोड़ा भिन्न है। यहां पर इस पर्व को उजाहवर थिरुनल नाम से जाना जाता है। तमिलनाडु के लोग यहां पर रहते हैं इसलिए श्रीलंका में इस पर्व को पोंगल भी कहते हैं।
कंबोडिया
कंबोडिया में मकर संक्रांति को मोहा संगक्रान कहा जाता है। यहां भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। माना जाता है कि यहां के लोग नए साल के आने और पूरा वर्ष खुशहाली बनी रहे इसके लिए ये पर्व हर्षोल्लास से मनाते हैं।
देश में भी अलग-अलग परम्पराएं
मकर संक्रांति त्योहार विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नाम से मनाया जाता है। अलग-अलग राज्यों, शहरों और गांवों में वहां की परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है। इसी दिन से अलग-अलग राज्यों में गंगा नदी के किनारे माघ मेला या गंगा स्नान का आयोजन किया जाता है। कुंभ के पहले स्नान की शुरुआत भी इसी दिन से होती है।
उत्तर प्रदेश मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व कहा जाता है। सूर्य की पूजा की जाती है, चावल और दाल की खिचड़ी खाई और दान की जाती है।
गुजरात और राजस्थान उत्तरायण पर्व के रूप में मनाया जाता है। पतंग उत्सव का आयोजन किया जाता है।
आंध्रप्रदेश संक्रांति के नाम से तीन दिन का पर्व मनाया जाता है।
तमिलनाडु किसानों का ये प्रमुख पर्व पोंगल के नाम से मनाया जाता है। घी में दाल-चावल की खिचड़ी पकाई और खिलाई जाती है।
महाराष्ट्र लोग गजक और तिल के लड्डू खाते हैं और एक दूसरे को भेंट देकर शुभकामनाएं देते हैं।
पश्चिम बंगाल में हुगली नदी पर गंगा सागर मेले का आयोजन किया जाता है।
असम भोगली बिहू के नाम से इस पर्व को मनाया जाता है।
पंजाब एक दिन पूर्व लोहड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है। धूमधाम के साथ समारोहों का आयोजन किया जाता है।
मकर संक्रांति पर यह भी परम्परा
मकर सक्रांति पर सबसे पहले बाजरे को कूट कर उसका खीचड़ा बनाया जाता है। उसके बाद अंगारी पर बाजरे का खीचड़ा, तिली का तेल ओर तिल के लड्डुओं से भोग लगा कर संक्रांति पूजी जाती है। साथ ही 14 चीजें सुहागन महिलाओं में बांटी जाती है और सास को बायना भी दिया जाता है। इसके अलावा घरों में दाल के पकौड़े ओर तिल की मिठाइयां बनाई जाती है। इसके अलावा कच्ची मूंग दाल, कच्चे चावल, घी, नमक व हल्दी मंदिर मे दी जाती है। मूंग दाल की खिचड़ी और घर घर जाकर गजक रेवड़ी व मूंगफली बांटी जाती है।
Published on:
14 Jan 2018 05:16 pm
